स्कूलों के बाद अब कॉलेज-यूनिवर्सिटी में भी आवारा कुत्तों की निगरानी: प्रोफेसरों को बनाया नोडल अधिकारी, उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

रायपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ में स्कूल कैंपस के बाद अब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आवारा कुत्तों की समस्या पर सख्ती बरतते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों तथा राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है।

यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के सुो मोटो रिट पिटिशन (सिविल) नंबर 05/2025 में दिए गए आदेशों के अनुपालन में जारी किए गए हैं।

आदेश के अनुसार, कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों एवं अन्य पशुओं के नियंत्रण, निगरानी तथा उनसे होने वाली संभावित घटनाओं की रोकथाम की जिम्मेदारी अब सीधे संबंधित संस्थान की होगी। इसके लिए हर संस्थान में एक प्रोफेसर या सहायक प्रोफेसर को नोडल अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य किया गया है।

नोडल अधिकारी का दायित्व होगा कि वे स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, नगर पालिका या परिषद से निरंतर समन्वय बनाए रखें। परिसर में यदि आवारा कुत्ते या अन्य पशु दिखाई दें, तो तुरंत संबंधित विभाग से संपर्क कर उन्हें हटवाया जाए।

प्रदेश स्तर पर उच्च शिक्षा विभाग ने डॉ. टी. जलजा नायर को राज्य नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, जिन्हें सभी संस्थानों के नोडल अधिकारी रिपोर्ट करेंगे।

नोडल अधिकारी का नाम, मोबाइल नंबर तथा हेल्पलाइन की जानकारी डिस्प्ले बोर्ड पर प्रदर्शित करना अनिवार्य है।

साथ ही, इस बोर्ड की फोटो वॉट्सएप के माध्यम से उच्च शिक्षा संचालनालय को भेजनी होगी, ताकि अनुपालन की जांच हो सके।

इस बात का रखें ध्यान:

संस्थान में खुले में कोई खाद्य सामग्री न पड़ी हो, जिससे आवारा पशु आकर्षित हों।

परिसर की लगातार निगरानी कर पशुओं के प्रवेश को नियंत्रित किया जाए।

जहां संभव हो, चारदीवारी को मजबूत बनाया जाए।

फर्स्ट एड और जागरूकता अनिवार्य: हर संस्थान में फर्स्ट एड बॉक्स उपलब्ध रखना जरूरी है। छात्रों एवं कर्मचारियों के लिए आवारा कुत्तों से बचाव एवं आपात स्थिति में क्या करें, इस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कार्यशालाएं भी करानी होंगी।

आपात स्थिति में सहायता के लिए राज्य हेल्पलाइन नंबर 1100 का व्यापक प्रचार-प्रसार करना भी अनिवार्य किया गया है।

यह कदम छात्रों एवं स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर आधारित है। विभाग ने 13 बिंदुओं में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।