बच्चों में बचपन से ही ईश्वर भक्ति के संस्कार दें : देवशरण दुबे

श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन वामन अवतार और प्रहलाद चरित्र का हुआ वर्णन

कोरबा। अभिभावकों को बच्चों में ईश्वर भक्ति और अच्छे संस्कार बचपन से ही विकसित करने चाहिए। इसके लिए बड़े होने का इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि विलंब होने पर संस्कार देने के कई अवसर छूट जाते हैं। यह बात सर्वधर्मार्थ कल्याण सेवा समिति के संस्थापक पंडित देवशरण दुबे ने सकरी, बिलासपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ कथा के तीसरे दिन कही।

कथा के दौरान उन्होंने वामन अवतार एवं प्रहलाद चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु ने राजा बलि के अहंकार का नाश करने के लिए वामन रूप धारण किया और उनसे तीन पग भूमि का दान मांगा। कथा प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को सत्य, भक्ति और विनम्रता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

कथावाचक का किया सम्मान
कथा के दौरान कोरबा जिला शाखा प्रभारी डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के नेतृत्व में अंचलवासियों की ओर से कथावाचक पंडित देवशरण दुबे को श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं बिल्व पौधा भेंटकर सम्मानित किया गया।

आयोजन में नेत्रनन्दन साहू, अश्विनी बुनकर, कमल धारीया, कुश गुप्ता एवं मनीष कौशिक सहित अन्य श्रद्धालुओं का सहयोग रहा। मुख्य यजमान चित्रकांत तिवारी एवं श्रीमती चंद्रकला तिवारी,पदमा-दुर्गा प्रसाद पाण्डेय तथा जया- लोकनाथ तिवारी सहित अन्य श्रद्धालु भी आयोजन में सहभागी रहे। श्रीमद्भागवत कथा का समापन रविवार को होगा।