रेडी टू ईट योजना: अनुबंध निरस्त कर पात्र समूह को मिला न्याय, अन्य परियोजनाओं में भी कार्रवाई की उम्मीद

विधानसभा में उठे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद प्रशासन की कार्रवाई

कोरबा। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 योजना के अंतर्गत रेडी टू ईट (RTE) तथा फोर्टिफाइड आटा निर्माण और आपूर्ति के लिए चयनित महिला स्व-सहायता समूहों की उदासीनता पर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है।

आकांक्षी जिला कोरबा में इसकी शुरुआत चोटिया परियोजना से की गई है।चयनित आदर्श महिला स्व-सहायता समूह, खिरटी (विकासखंड पोड़ीउपरोड़ा) द्वारा कार्य शुरू न करने और रुचि न दिखाने पर जिला पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने समूह का अनुबंध निरस्त कर दिया है।

इसके बदले प्रतीक्षा सूची में शामिल स्मृति महिला स्व- सहायता समूह, बुढ़ीपीपर टिहली सरई (पोस्ट मोरगा) को संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यह कार्रवाई विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत द्वारा मानसून सत्र (8 जुलाई 2025) में रेडी टू ईट समूह चयन में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोपों से जुड़ी हुई मानी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि शीतकालीन सत्र में संभावित हंगामे को देखते हुए यह कदम उठाया गया, ताकि पात्र समूहों को न्याय मिल सके।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 24 मार्च 2025 को जारी निर्देश के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कोरबा सहित रायगढ़, बलौदाबाजार-भाटापारा, बस्तर, दंतेवाड़ा और सूरजपुर जिलों में महिला स्व-सहायता समूहों से रेडी टू ईट एवं फोर्टिफाइड आटा निर्माण का कार्य सौंपा गया था।

कोरबा जिले में जिला स्तरीय चयन समिति की अनुशंसा पर 28 मई 2025 को चयन आदेश जारी हुए थे, लेकिन छह माह बीतने के बावजूद कई परियोजनाओं में उत्पादन शुरू नहीं हो सका।

जिले की चार परियोजनाओं के रेडी टू ईट नमूने केंद्रीय खाद्य प्रयोगशाला, ठाणे (महाराष्ट्र) भेजे गए हैं, जिनमें दो की रिपोर्ट संतोषजनक आई है, जबकि दो लंबित हैं। अन्य परियोजनाओं के नमूने अभी भेजे नहीं जा सके हैं।

आरोप है कि स्मृति महिला स्व-सहायता समूह बुढ़ीपीपर का नाम प्रारंभिक प्राविधिक सूची में था, लेकिन अंतिम सूची में नियमों के विपरीत अंक देकर इसे बाहर कर दिया गया।

चयन समिति ने कथित तौर पर पात्र समूह की अनदेखी कर आदर्श समूह खिरटी को चुन लिया, जबकि उस समूह के नाम पहले से दो अन्य परियोजनाएं चल रही थीं, जो नियमों का उल्लंघन है।

चोटिया परियोजना में इस फैसले के बाद कटघोरा, हरदीबाजार, पसान और कोरबा ग्रामीण परियोजनाओं के उन महिला समूहों में उम्मीद जगी है, जिन्होंने चयन प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय और संभागायुक्त बिलासपुर से की थी। इन समूहों का कहना है कि यदि चोटिया में पात्र समूह को न्याय मिला है, तो अन्य परियोजनाओं में भी जल्द कार्रवाई होगी।