“मालगाड़ी फर्स्ट” नीति से कोरबा के यात्री त्रस्त,हसदेव एक्सप्रेस 9:45 की जगह आधी रात को पहुँच रही; आंदोलन की चेतावनी

कोरबा।देश के सर्वाधिक राजस्व देने वाले स्टेशनों में गिने जाने वाले कोरबा रेलवे स्टेशन का संचालन इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। कोयला परिवहन के दबाव वाले इस रूट पर रेलवे की “मालगाड़ी फर्स्ट, यात्री लास्ट” नीति ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोरबा आने वाली लगभग सभी यात्री ट्रेनों को चांपा और कोरबा के बीच जानबूझकर देर तक रोका जा रहा है, ताकि मालगाड़ियाँ पहले निकाली जा सकें।

चांपा–कोरबा सेक्शन बना सबसे बड़ा अवरोध

यात्रियों का आरोप है कि पिछले महीनों से कोरबा–चांपा के 35–40 किमी के सफर में यात्रियों की ट्रेनें घंटों अटक रही हैं।
सरोना, नईपारा, माधवाडीह, कोरबा आउटर जैसे छोटे स्टेशनों पर लगातार रुकावटें दी जा रही हैं, जबकि सामने से मालगाड़ियों का अंतहीन काफिला निकाला जा रहा है।

हसदेव एक्सप्रेस का बुरा हाल: 9:45 की ट्रेन पहुँचती 12:30 बजे

सबसे ज्यादा प्रभावित हसदेव एक्सप्रेस (रायपुर–गेवरारोड–कोरबा) है।

रोज़ाना रात 9:45 बजे पहुँचने वाली यह ट्रेन अब 10:30, 11:00 या यहाँ तक कि 12:30 बजे के बीच किसी भी समय कोरबा पहुँच रही है।

यात्रियों का कहना है

“चांपा तक ट्रेन ठीक चलती है, लेकिन उसके बाद 2–3 घंटे में कोरबा पहुँचती है। हर आउटर पर रोककर मालगाड़ियों को पास कराया जाता है।”

यात्रियों का फूटा गुस्सा, स्टेशन अधीक्षक कक्ष में हंगामा

बुधवार देर रात भी ट्रेन डेढ़ घंटे की देरी से आई तो यात्रियों ने स्टेशन अधीक्षक के कक्ष में घुसकर जोरदार हंगामा किया।
अधिकारियों का कहना था

“ऊपर से ऑर्डर है, मालगाड़ी को पहले क्रॉस कराना है। हमारी कोई गलती नहीं।”

यात्रियों का आरोप है कि स्टाफ इस समस्या को मज़ाक में टाल देता है और कोई स्थायी समाधान नहीं देता।

नौकरीपेशा और व्यापारियों पर भारी असर

कोरबा की यह एकमात्र रात की सीधी ट्रेन है। इसके रोज़ाना लेट होने से

नौकरीपेशा लोग देर से दफ्तर पहुँच रहे हैं,

व्यापारी समय पर अपने काम नहीं निपटा पा रहे,

कई लोग मजबूरी में महँगी बस या कैब का उपयोग कर रहे हैं।

इससे रेलवे को भी भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि टिकट बिक्री घट रही है। यात्रियों का आरोप है

“फिर अधिकारी यही बोलते हैं कि यात्री कम हैं, इसलिए नई ट्रेनें नहीं मिल सकतीं।”

आंदोलन की चेतावनी, समाधान की माँग

स्थानीय सामाजिक संगठनों व यात्रियों में गहरा आक्रोश है। चेतावनी दी गई है कि यदि हालात न सुधरे तो

रेल रोको आंदोलन, कोरबा–चांपा सेक्शन बंद करने
जैसे बड़े विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

यात्रियों की प्रमुख माँगें:

1. कोरबा–चांपा के बीच एक डेडिकेटेड पैसेंजर लाइन का प्रावधान हो।

2. रात 8 बजे के बाद मालगाड़ियों की क्रॉसिंग पर रोक लगाई जाए, ताकि रात की यात्री ट्रेनें समय पर चल सकें।

फिलहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है और रेलवे की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। कोरबा के यात्रियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।