नाबालिग से अनाचार के दोषी सौतेले पिता को 30 साल की सजा

एपीपी सुनील मिश्रा ने रखा अभियोजन का पक्ष

कोरबा। नाबालिग पुत्री से अनाचार के गंभीर मामले में कोरबा के अपर सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक ने आरोपी सौतेले पिता को 30 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

न्यायालय ने आरोपी पर एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं बीएनएस की धारा 351 के तहत दो वर्ष की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है।

मामले में अभियोजन की ओर से एपीपी सुनील मिश्रा ने पक्ष रखा। आरोपी धर्मेंद्र साहू (43) मानिकपुर डिपरापारा का निवासी है। प्रकरण की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक सीमा प्रताप चंद्रा की अदालत में हुई।

सूनेपन का फायदा उठाकर किया अनाचार
अभियोजन के अनुसार 30 जुलाई 2025 को पीड़िता अपनी नानी के घर पर थी। उसकी बहनें स्कूल गई हुई थीं। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी ने अकेलेपन का फायदा उठाकर नाबालिग के साथ अनाचार किया। इसके बाद 2 अगस्त को भी आरोपी ने पीड़िता के साथ जबरदस्ती की और घटना किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।

डर के कारण पीड़िता ने कुछ समय तक घटना की जानकारी किसी को नहीं दी। बाद में उसने अपनी मां को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ था मामला
पीड़िता की शिकायत पर मानिकपुर पुलिस ने संबंधित धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच के दौरान पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।

अदालत में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और पक्ष को सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना और 30 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।