हाथियों का खतरा बढ़ा, प्रभावित गांवों में हर रात 9 घंटे का पॉवर कट

वन विभाग के निर्देश पर सीएसईबी की कार्रवाई, 50 हजार आबादी अंधेरे में

कोरबा। जिले के दोनों वनमंडलों में हाथियों की सक्रियता बढ़ने के कारण ग्रामीणों को हर रात नौ घंटे तक अंधेरे में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वन विभाग की हिदायतों के बाद सीएसईबी कोरबा ग्रामीण डिवीजन ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक नियमित पॉवर कट लागू कर दिया है, ताकि जंगली हाथियों की सुरक्षा और विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव हो सके।

भैंसमा तहसील के बरपाली (जिल्गा), कुदमुरा, चिर्रा, गिरारी और श्यांग इलाकों में पिछले दो दिनों से लगातार यह व्यवस्था लागू है। इन क्षेत्रों में धान उपार्जन समितियां संचालित हैं और करीब 50 हजार की आबादी निवास करती है।

धान उपार्जन समितियों के कर्मचारियों ने चिंता जताई है कि बड़ी मात्रा में उपार्जित धान का स्टॉक मौजूद है। रात में सुरक्षा व्यवस्था के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है और आसपास उच्च क्षमता वाले हेलोजन लगाए गए हैं, लेकिन बिजली कटौती के चलते पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है। इससे धान की सुरक्षा के साथ-साथ जनहानि और संपत्ति को नुकसान का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों का कहना है कि “एक तरफ हाथियों का भय और दूसरी ओर बिजली नहीं होने से असुरक्षा दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।”

सीएसईबी ने कहा हाथियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम

सीएसईबी कोरबा ग्रामीण डिवीजन के कार्यपालन अभियंता एस. सोनी ने बताया कि यह व्यवस्था अस्थायी है। कई क्षेत्रों में बिजली के तार झूल रहे हैं और रात में हाथियों के संपर्क में आने से बड़ा हादसा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि वन विभाग के निर्देश पर प्रदेश भर में हाथी प्रभावित क्षेत्रों में यही व्यवस्था अपनाई जा रही है। यदि बरपाली या चिर्रा क्षेत्र से हाथियों का मूवमेंट आगे बढ़ता है तो वहां पॉवर कट बंद हो जाएगा और व्यवस्था दूसरे क्षेत्रों में लागू होगी।