पर्याप्त मुआवजा, बसाहट और ड्रोन सर्वे पर आपत्ति; गेवरा विस्थापित भी नाराज
कोरबा।साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की करतली ईस्ट खदान परियोजना को लेकर विरोध लगातार बढ़ रहा है। उड़ता, पुटा, ढनढनी सहित आसपास के कुल पाँच प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने साफ कहा है कि खदान तभी खुलने दी जाएगी, जब प्रबंधन उनकी संपूर्ण रिहायशी और कृषि भूमि का अधिग्रहण करेगा। ग्रामीणों ने आंशिक भूमि अधिग्रहण के किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
ग्रामीणों ने कहा कि अगर एसईसीएल कुछ जमीन अधिग्रहित कर बाकी छोड़ देता है तो वे बीच में फंस जाएंगे और उनका जीवन दुभर हो जाएगा। इसी वजह से उन्होंने ड्रोन सर्वे का भी विरोध करते हुए चेताया कि पहले मुआवजा, बसाहट और सभी बुनियादी सुविधाएँ एडवांस में दी जाएं।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए कहा “जमीन हमारी, संसाधन हमारे, पहला हक भी हमारा।” लोगों ने बताया कि अन्य परियोजनाओं में वर्षों बीत गए लेकिन न रोजगार मिला, न बसाहट, न ही लंबित मुआवजा मामलों का समाधान हुआ। इसलिए वे अब केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेंगे।
प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप
कुसमुंडा क्षेत्र के गेवरा के विस्थापितों ने भी एसईसीएल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2015 में इंदिरा स्टेडियम कुसमुंडा में हुई जनसुनवाई में स्पष्ट घोषणा की गई थी कि गेवरा ग्राम को वैशालीनगर खमरिया में बसाया जाएगा।
लेकिन 11 साल बीतने के बाद भी विस्थापन की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी गहराती जा रही है।
वे मांग कर रहे हैं कि मुआवजा सहित सभी लंबित मसलों का तत्काल समाधान हो।
Editor – Niraj Jaiswal
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