मछली पालन पर ठेका प्रथा का विरोध, मछुआरा समितियों ने खुद करने का लिया निर्णय

कोरबा। हसदेव बांगो बांध में मछली पालन कार्य को ठेके पर देने की तैयारी के विरोध में 22 पंजीकृत मछुवारा समितियाँ मुखर हो गई हैं। इन समितियों ने स्पष्ट कहा है कि वे अपने परंपरागत अधिकारों पर ठेकेदारों का कब्जा नहीं होने देंगे और स्वयं ही मछली पालन एवं शिकार का काम करेंगी। इस मुद्दे पर आयोजित बैठक में 58 गांवों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।

बैठक में बांध निर्माण के कारण वर्षों से झेलनी पड़ रही समस्याओं पर चर्चा की गई। मछुआरा समितियों ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग ठेकेदार से सांठगांठ कर अनुबंध करने की कोशिश कर रहा है, जो स्थानीय समुदाय के हितों के खिलाफ है। छातापखना मछुआरा समिति के अध्यक्ष दीपक मंझवार ने कहा कि वर्तमान मत्स्य नीति का वे लंबे समय से विरोध कर रहे हैं।

नारी शक्ति मछुआरा समिति की प्रतिनिधि तथा बुका गांव के फिरतु बिंझवार ने बताया कि पिछले ठेकेदार ने मछुआरों का शोषण किया मछलियाँ औने–पौने दामों पर खरीदी गईं और विरोध करने पर मारपीट व पुलिस कार्रवाई की धमकियाँ दी गईं।

उपस्थित समितियों और आदिवासी प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि वे ठेकेदारों के लिए काम नहीं करेंगे और अपनी जल–जंगल–जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। साथ ही उन्होंने बांध क्षेत्र की पारिस्थितिकी और जल संरक्षण को बचाने का संकल्प भी व्यक्त किया।