करतली ईस्ट कोयला परियोजना के ड्रोन सर्वे का ग्रामीणों ने किया खुला विरोध, विधायक के नेतृत्व में कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

कोरबा/पाली। एसईसीएल की प्रस्तावित करतली ईस्ट कोयला परियोजना को लेकर पाली क्षेत्र के पांच गांवों – पुटा, उड़ता, नुनेरा, डोंगानाला और करतली – में ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। रविवार को पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम की अगुवाई में पीडब्ल्यूडी विश्रामगृह पाली में सैकड़ों ग्रामीणों की बड़ी बैठक हुई।

बैठक में 10 से 20 दिसंबर के बीच प्रस्तावित ड्रोन सर्वे का सर्वसम्मति से पुरजोर विरोध किया गया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर जबरन ड्रोन सर्वे कराया गया तो वे सड़क पर उतरकर इसका डटकर मुकाबला करेंगे।

ग्रामीणों ने कलेक्टर कोरबा, एसडीएम (राजस्व) पाली तथा महाप्रबंधक एसईसीएल कोरबा क्षेत्र के नाम ज्ञापन सौंपकर ड्रोन सर्वे पर तत्काल रोक लगाने और 14 साल से लंबित समस्याओं के समाधान की मांग की है।

बैठक में बताया गया कि ग्राम पुटा सहित अन्य गांवों की जमीन का अधिग्रहण 2011 में कोल बेयरिंग एक्ट के तहत किया गया था, लेकिन आज तक न मुआवजा निर्धारित हुआ, न भुगतान हुआ और न ही जमीन का कब्जा लिया गया। इस कारण ग्रामीण आर्थिक-सामाजिक दोनों स्तर पर बदहाली का शिकार हैं।

विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से साफ कहा, “कोरबा जिले में एसईसीएल की दूसरी परियोजनाओं में भू-विस्थापितों के साथ जो अन्याय हुआ है, वह सबके सामने है। लोग आज भी नौकरी, मुआवजा और पुनर्वास के लिए दर-दर भटक रहे हैं। करतली ईस्ट में ऐसा नहीं होने देंगे। हर काम कानून के दायरे में और ग्रामसभा की सहमति से ही होगा।”

ग्रामीणों की 11 प्रमुख आपत्तियां एवं मांगें:

ग्रामसभा की अनुमति एवं सहमति के बिना सिर्फ सूचना देकर ड्रोन सर्वे करना अवैध

14 साल बाद भी अधिग्रहित जमीन का मुआवजा निर्धारण एवं भुगतान नहीं

राजस्व रिकॉर्ड में नाम, खसरा, रकबा में भारी त्रुटियां
पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य, इसका पालन नहीं

वनाधिकार पट्टाधारी हितग्राहियों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में अद्यतन नहीं

आंशिक अधिग्रहण से बची हुई जमीन पर खेती असंभव हो जाएगी

खदान से प्रदूषण और भूजल स्तर गिरने से बची जमीन अनुपजाऊ हो जाएगी

खातेदारों का आपसी सहमति से खाता विभाजन कराया जाए

राजस्व रिकॉर्ड सुधार के लिए तत्काल राजस्व शिविर लगाया जाए

पुराने सभी लंबित मुआवजे LARR एक्ट 2013 के तहत दिए जाएं

सभी समस्याओं का समाधान होने तक किसी भी सर्वे या कार्य की अनुमति नहीं

ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं और कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं होता, तब तक ड्रोन सर्वे सहित कोई भी कार्य क्षेत्र में नहीं होने दिया जाएगा।