पौष मास में ठंड से बढ़ते रोगों से बचें, चीनी की जगह गुड़ का प्रयोग करें : डॉ. नागेंद्र

कोरबा। 6 दिसंबर से प्रारंभ होकर 3 जनवरी 2026 तक चलने वाले पौष (पूस) मास को लेकर नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने विशेष स्वास्थ्य सलाह दी है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में ठंडी हवाएँ अत्यधिक प्रबल होने से वातावरण गहराई तक ठंडा हो जाता है और कोहरा भी लगातार छाया रहता है। हेमंत ऋतु के अंतिम माह के रूप में पौष में दिन छोटे एवं रात्रि लंबी होती है। वर्ष का सबसे छोटा दिन 21 दिसंबर भी इसी माह में आता है।

डॉ. नागेंद्र ने बताया कि पौष माह में कफ का संचय और वात दोष का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे संधिशूल, संधिशोथ, श्वास-कास, सर्दी-जुकाम, वात–कफ जनित ज्वर तथा त्वचा संबंधी रोगों की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में शरीर को गर्माहट एवं ऊर्जा प्रदान करने वाले गुरु आहार का सेवन विशेष रूप से लाभकारी होता है।

उन्होंने कहा कि इस माह में मधुर, अम्ल और लवण रस युक्त स्निग्ध तथा पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना चाहिए। साथ ही अतिशीत, रुक्ष, लघु भोजन तथा कटु, तिक्त और कषाय रस वाले आहार से परहेज करना चाहिए। डॉ. नागेंद्र ने विशेष रूप से चेताया कि पौष मास में धनिये का सेवन स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ा सकता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि इस मौसम में दूध, मेवे, अजवाईन, अदरक और लौंग का सेवन लाभकारी होगा। साथ ही चीनी के स्थान पर गुड़ का प्रयोग करना शरीर के लिए अधिक हितकारी बताया।