ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति ने SDM पाली, CMD एवं GM को सौंपा ज्ञापन, कहा – गांव मिटा दिया लेकिन वादे पूरे नहीं किए
कोरबा। दक्षिण पूर्व कोयला क्षेत्र लिमिटेड (SECL) गेवरा क्षेत्र द्वारा वर्ष 2010 में पाली विकासखंड के ग्राम अमगांव को कोयला खदान विस्तार के लिए अधिग्रहित किया गया था। 15 साल बीत जाने और 2025 में राज्य शासन की मंजूरी के बाद कलेक्टर के आदेश से गांव को पूरी तरह विलोपित कर दिए जाने के बावजूद भू-विस्थापित परिवारों की मूलभूत समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति के बैनर तले ग्रामीणों ने सोमवार को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पाली, SECL के CMD एवं महाप्रबंधक गेवरा को ज्ञापन सौंपकर तत्काल समाधान की मांग की है।
समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने प्रबंधन और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “गांव को विस्थापन से पहले सभी समस्याओं का समाधान करना था, लेकिन गांव का नामोनिशान मिटा देने के बाद भी लोगों को रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे के लिए दर-दर भटकाया जा रहा है।”
ग्रामीणों के अनुसार अभी भी करीब 235 भू-विस्थापितों को जमीन, मकान एवं अन्य परिसंपत्तियों का मुआवजा नहीं मिला है। छोटी-मोटी दस्तावेजी खामियों का हवाला देकर महीनों-वर्षों से लोग चक्कर काट रहे हैं। वहीं कई परिवारों को नियमानुसार पुनर्वास तक नहीं दिया गया और कुछ को “अपात्र” घोषित कर दिया गया है।
समिति ने मांग की है कि :
शेष सभी भू-विस्थापित परिवारों का लंबित मुआवजा तत्काल दिया जाए।
जिन परिवारों का पुनर्वास अभी तक नहीं हुआ है, उन्हें बतारी (नेहरू नगर) पुनर्वास स्थल में तुरंत बसाया जाए तथा वहां बिजली, पानी, सड़क, स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास कार्य पूरा कराया जाए।
सपुरन कुलदीपति ने चेतावनी दी कि ज्ञापन पर सकारात्मक और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई तो बहुत जल्द समिति पूरे क्षेत्र के भू-विस्थापितों के साथ मिलकर आक्रामक आंदोलन शुरू करेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि 15 साल पहले दिए गए वादे आज तक अधर में लटके हैं और गांव भले ही नक्शे से मिटा दिया गया हो, लेकिन उनके हक और तकलीफें अभी भी जीवित हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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