छुरी जलाशय नहर जीर्णोद्धार कार्य में तकनीकी खामियां उजागर, मानकविहीन बेस कंक्रीट ध्वस्त कर पुनर्निर्माण के निर्देश

कोरबा।जिले के कटघोरा विकासखंड अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा छुरी जलाशय की नहर के जीर्णोद्धार कार्य के दौरान निर्माण गुणवत्ता में गंभीर तकनीकी खामियां पाई गई हैं। निरीक्षण के दौरान नहर का बेस कंक्रीट निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप नहीं पाया गया, जिसके फलस्वरूप संबंधित भाग को ध्वस्त कर पुनः मानक अनुसार निर्माण कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता नयन रंजन चौधरी द्वारा स्थल निरीक्षण के दौरान उक्त अनियमितता संज्ञान में लाई गई। इस संबंध में कटघोरा अनुविभाग के एसडीओ कमलेश तिवारी को नोटिस जारी कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराने तथा सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

निरीक्षण के समय कार्य स्थल पर संबंधित सब इंजीनियर की अनुपस्थिति पाई गई, जिससे कार्य की समुचित निगरानी नहीं होने की स्थिति उत्पन्न हुई। इसके परिणामस्वरूप ठेकेदार द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों की अवहेलना किए जाने की स्थिति सामने आई है।

उल्लेखनीय है कि छुरी जलाशय का निर्माण वर्ष 1977 में किया गया था, जिसके माध्यम से ग्राम छुरी, बंचर एवं जटांगपुर के कुल 465 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। नहर के जर्जर होने से सिंचाई क्षमता में कमी आ रही थी। इस दृष्टि से 263.61 लाख रुपए की लागत से नहर जीर्णोद्धार कार्य स्वीकृत किया गया है। उक्त कार्य एक निजी निर्माण एजेंसी को आवंटित किया गया है।

नहर की कुल लंबाई 3.11 किलोमीटर है। कार्यादेश मार्च 2024 में जारी किया गया था तथा कार्य पूर्णता की समय-सीमा मार्च 2026 निर्धारित है।

नहर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर प्राप्त शिकायतों के आधार पर अब तक दो बार जांच की जा चुकी है। पूर्व में तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था, वहीं बाद में हसदेव बांगो परियोजना के मुख्य अभियंता द्वारा भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण किया गया।

कार्य की गुणवत्ता एवं तकनीकी अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कार्यपालन अभियंता द्वारा सब इंजीनियर की ड्यूटी विशेष रूप से मॉनिटरिंग हेतु निर्धारित की गई है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की पुनरावृत्ति न हो।