क्रोध से आत्मबल कमजोर होता है, विवेक नष्ट हो जाता है : बीके भगवान

ब्रह्माकुमारीज के दो दिवसीय राजयोग साधना शिविर का समापन, क्रोध को जड़ से खत्म करने पर जोर

कोरबा। क्रोध करने से मनुष्य का विवेक खत्म हो जाता है और आत्मबल इतना कमजोर पड़ जाता है कि व्यक्ति अपराध की राह पर चल पड़ता है। यह चेतावनी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, माउंट आबू के वरिष्ठ राजयोग शिक्षक बीके भगवान भाई ने दी।

वे मंगलवार को स्थानीय ब्रह्माकुमारीज राजयोग सेवा केंद्र में आयोजित दो दिवसीय राजयोग साधना शिविर के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। बीके भगवान भाई ने कहा, “नकारात्मक विचार, शंका-कुशंका, ईर्ष्या, घृणा, नफरत और अभिमान यही क्रोध के बीज हैं। जहां क्रोध है, वहां रिश्तों में कड़वाहट और जीवन में बरकत दोनों नहीं रह सकतीं।”

पर्यावरण अधिकारी प्रमेंद्र  पाण्डे ने कहा कि हमारे मन के विचार केवल हमें ही नहीं, बल्कि पूरे वातावरण, पेड़-पौधों और आसपास के लोगों को भी प्रभावित करते हैं। डॉ. विवेक सिन्हा ने जोर दिया कि रोगमुक्त, दीर्घायु, शांत और सफल जीवन के लिए सबसे जरूरी है – विचारों को सकारात्मक बनाना है।

सेवा केंद्र संचालिका बीके बिंदु बहन ने राजयोग की सरल विधि बताते हुए कहा, “स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा से योग लगाने मात्र से हम कहीं भी यात्रा कर सकते हैं और अपने संस्कारों को सतोप्रधान बना सकते हैं।”

कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध वर्ग की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।