त्रेता में वचन का वजन प्राणों से भी भारी था : शंभूशरण लाटा

कोरबा। पीली कोठी (दीनदयाल मार्केट, पावर हाउस रोड) में चल रहे श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठे दिन प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित शंभू शरण लाटा महाराज ने राम वनवास प्रसंग पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रघुवंश में वचन प्राणों से भी ऊपर माना जाता था। इसी कारण माता कैकई के वरदान मांगते ही भगवान श्री राम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार कर लिया।

कथा में महाराज जी ने बताया कि त्रेता युग में नैावार मूल्य और मर्यादा सर्वोपरि थे। राजा दशरथ ने जब श्री राम को वनवास से रोकने की बहुत कोशिश की, तब भी राम ने स्पष्ट इंकार कर दिया क्योंकि पिता का पहले दिया हुआ वचन उनके लिए सर्वोच्च था।

राम के वनगमन और वन के विभिन्न प्रसंगों पर चर्चा करते हुए लाटा महाराज ने कहा कि प्रारब्ध में जो लिखा होता है, वह अवश्य घटित होता है। वनवास काल में श्री राम ने अनेक आसुरी शक्तियों का संहार किया और धर्म की स्थापना की।

नागरिक संगठन द्वारा आयोजित इस सप्ताहिक राम कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा प्रतिदिन शाम 4 बजे से शुरू होती है।