कोरबा। जिले के जंगली और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध जुआ कारोबार इन दिनों चरम पर है। गोढ़ी, चाकामार और कोरकोमा के जंगलों में खुलेआम चल रहे जुआ के फड़ जुआड़ियों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं। यहां न केवल भारी दांव लगाए जा रहे हैं बल्कि जुआ संचालक हरि, ननकू, भागीरथी और सुकलाल मिलकर इस अवैध धंधे को मजबूती से संचालित कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार इन फड़ में प्रवेश के लिए प्रति जुआरी 500 रुपये एंट्री फीस ली जाती है और हर खिलाड़ी की जीत पर 10% नाल की वसूली भी की जाती है। इतना ही नहीं, पैसे खत्म होने पर यहां ब्याज पर रकम देने का ‘सिस्टम’ भी बना हुआ है, जिससे कई ग्रामीण कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
हरिराम नाम का व्यक्ति स्वयं को इस पूरे जुआ नेटवर्क का मुख्य संचालक बताता है और दावा करता है कि वह क्राइम ब्रांच और पुलिस विभाग के कुछ लोगों को पैसे देता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से बिना रोक-टोक यहां रोज लाखों रुपये का खेल चलता है, उस पर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं कि आखिर लगातार मुखबिरी कैसे चूक रही है।
सूत्र बताते हैं कि 52 परी खेल में प्रति घंटे तकरीबन 50 हजार रुपये की वसूली होती है और पड़ोसी जिलों व बाहरी क्षेत्रों के खिलाड़ी भी यहां नियमित पहुंचते हैं।
शहर में भी सक्रिय जुआ नेटवर्क
सिर्फ ग्रामीण ही नहीं बल्कि कोरबा शहर के भी कई हिस्सों में जुआरी सक्रिय हैं। खासकर सुनसान नदी घाट और पुराने शहर के आंतरिक इलाकों में रात होते ही जुआरियों की महफिल सजने लगती है। कहा जाता है कि पुलिस की कार्रवाई में जोखिम को देखते हुए ऐसे स्थान चुने जाते हैं जहां अचानक दबिश से भागने के रास्ते आसान हों।
स्थानीय लोग लंबे समय से इस अवैध गतिविधि के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा है। अवैध जुआ का यह बढ़ता जाल न केवल सामाजिक माहौल खराब कर रहा है बल्कि अपराध और कर्ज की स्थितियां भी बढ़ा रहा है।
Editor – Niraj Jaiswal
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