पुनर्वास स्थल पर ही संचालित हों सरकारी कार्यालय, भिलाईबाजार विस्थापितों की मांग

कोरबा। एसईसीएल गेवरा खदान विस्तार के कारण आसपास के ग्रामों में विस्थापन की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में भिलाईबाजार के ग्रामीणों ने बैठक आयोजित कर मांग उठाई कि भविष्य में जहां भी पुनर्वास किया जाए, वहीं पर सरकारी कार्यालयों का संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को आवश्यक सेवाओं के लिए भटकना न पड़े।

ग्रामीणों ने बताया कि भिलाईबाजार क्षेत्र का अधिग्रहण जल्द होने वाला है। बैठक में उपस्थित लोगों ने स्पष्ट कहा कि वे सर्वमंगला नगर इलाके में ही पुनर्वास चाहते हैं और बाता बिरदा तथा अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में बसने को तैयार नहीं हैं। बैठक में प्रदीप जायसवाल, दुर्गा महंत, राकेश राजपूत, राजकुमार पटवा, बबिता मरकाम, गणेश मरकाम, ममता मरकाम, पबरित बाई, इंदु पाटले, गोरे पाटले, सम्मेलाल पाटले सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे।

बैठक में ग्रामीणों की सुविधा, सरकारी सेवाओं की उपलब्धता और पुनर्वास संबंधी विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। दूसरी ओर, एसईसीएल दीपका खदान विस्तार से प्रभावित हरदीबाजार गांव में परिसंपत्तियों का मूल्यांकन संयुक्त टीम द्वारा किया जा रहा है।

कई प्रभावितों ने मूल्यांकन पर असहमति जताई है, क्योंकि उन्हें मुआवजा राशि में कटौती की आशंका है। वहीं, हाल के वर्षों में भूमि की खरीदी-बिक्री होने से नए खातेदार 100 फीसदी सोलिसियम की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पुनर्वास प्रक्रिया को पारदर्शी रखा जाए और उनकी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएं।