125वें वर्ष में निकलेगी दादरखुर्द की ऐतिहासिक रथयात्रा, तैयारियां तेज

कोरबा।जिले के दादरखुर्द गांव में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष अपने 125वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया पर निकलने वाली इस पारंपरिक रथयात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धा और आस्था के इस आयोजन के लिए नगर निगम ने इस बार अनुदान राशि बढ़ाकर 3 लाख रुपये स्वीकृत की है। इससे पहले आयोजन के लिए 2 लाख रुपये दिए जाते थे। स्थानीय नागरिकों और मेला लगाने वाले व्यापारियों का भी आयोजन में सहयोग रहता है।

मान्यता के अनुसार महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं। इसी परंपरा के तहत पिछले एक पखवाड़े से मंदिर के पट बंद हैं। इस दौरान भगवान को आमरस, जामुन के काढ़े का भोग तथा उड़द की खिचड़ी का प्रसाद अर्पित किया जा रहा है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन भजन-कीर्तन हो रहा है और श्रद्धालु भगवान के स्वस्थ होने तथा पट खुलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

मंदिर के पुजारी रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि 16 जुलाई को ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के पट खोले जाएंगे। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की सुसज्जित प्रतिमाओं को भव्य रथ पर विराजमान कर पूरे गांव में नगर भ्रमण कराया जाएगा। रथयात्रा में जिलेभर से हजारों श्रद्धालु शामिल होकर रथ खींचने का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। इस अवसर पर विशाल मेले का भी आयोजन होगा।

ग्रामीणों के अनुसार दादरखुर्द की रथयात्रा की शुरुआत लगभग 125 वर्ष पूर्व अंचल के प्रसिद्ध थवाईत परिवार ने जगन्नाथपुरी की यात्रा से लौटने के बाद की थी। तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है और आज यह कोरबा जिले की ऐतिहासिक धार्मिक धरोहर के रूप में पहचान बना चुकी है।