नई लेबर कोड से मजदूरों के अधिकार खतरे में : दीपेश मिश्रा

कोरबा। केंद्र सरकार द्वारा देशभर की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के विरोध के बावजूद चार नए श्रम संहिताओं औद्योगिक संबंध, मजदूरी संहिता, सामाजिक सुरक्षा और पेशागत सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की अधिसूचना जारी कर दी गई है। एटक के राज्य सचिव दीपेश मिश्रा ने कहा कि सरकार सुधार के नाम पर 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर बनाए गए इन लेबर कोड्स के जरिए कर्मचारियों को प्राप्त कानूनी सुरक्षा समाप्त कर रही है।

दीपेश मिश्रा ने चेताया कि नए प्रावधानों से देश की तीन-चौथाई कंपनियों में बंधुआ मजदूरी जैसी स्थिति बन सकती है। 300 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियों को मनमाने ढंग से हायर-फायर करने और बिना रोक-टोक कंपनी बंद करने की छूट दे दी गई है। वहीं मजदूरों के काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 कर दिए गए हैं।

लेबर कोड में हड़ताल पर सख्त पाबंदी, ट्रेड यूनियन पंजीयन प्रक्रिया को जटिल बनाना और ट्रेड यूनियन कानून 1926 को कमजोर करने जैसे कदम, मजदूर संगठनों के अस्तित्व पर सीधा हमला माने जा रहे हैं। नौकरी से निकाले गए मजदूरों के लिए बनाए गए विशेष फंड को भी उन्होंने महज दिखावा बताया।

इन सभी मुद्दों को लेकर देशभर की मजदूर यूनियनें 26 नवंबर को राष्ट्रीय आंदोलन करेंगी।