कोरबा।एसईसीएल के कुसमुंडा, गेवरा, दीपका और कोरबा क्षेत्र के भूविस्थापित ग्रामीणों ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ किसान सभा व भूविस्थापित रोजगार एकता संघ के नेतृत्व में एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर का चार घंटे तक घेराव कर उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अर्जन के बाद जन्म, छोटे खातेदारों को रोजगार, लंबित प्रकरणों का निराकरण और आउटसोर्सिंग कार्यों में 100% स्थानीय रोजगार की प्रमुख मांगों के साथ जोरदार नारेबाजी की।
मुख्य द्वार पर लगाए गए दो चरणों के बेरिकेट्स को तोड़ने की कोशिश में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा कर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सीएमडी से चर्चा नहीं हुई तो घेराव जारी रहेगा।
आखिरकार, मुख्यालय प्रशासन ने किसान सभा के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया। बैठक में किसान सभा की ओर से प्रशांत झा, दीपक साहू, रेशम यादव, दामोदर श्याम, रघु यादव सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए। एसईसीएल की ओर से सीएमडी हरीश दूहन, डीपी विरंची दास तथा बोर्ड सदस्य उपस्थित थे।
वार्ता में किसान सभा ने 1978 से 2004 तक अर्जित भूमि वाले सभी खातेदारों को स्थायी रोजगार, अर्जन के बाद जन्म वाले प्रकरणों का निराकरण, छोटे खातेदारों को रोजगार, प्रभावित गांवों के बेरोजगारों के लिए आउटसोर्सिंग में 100% प्राथमिकता जैसे मुद्दे प्रमुखता से रखे।
सीएमडी हरीश दूहन ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुनकर कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए जल्द ही उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी और लंबित रोजगार प्रकरणों में तेजी से कार्यवाही की जाएगी। आश्वासन मिलने के बाद चार घंटे से चल रहा घेराव समाप्त हुआ।
किसान सभा ने हालांकि स्पष्ट कर दिया कि यदि मांगे पूरी नहीं होतीं तो 16 दिसंबर को गेवरा क्षेत्र और 30 दिसंबर को कुसमुंडा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आंदोलन और खदान बंद करने की कार्रवाई होगी। इसके लिए नोटिस भी अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर जिन किसानों की जमीन ली गई, उन्हें आज तक रोजगार नहीं मिला है। यदि इस बार भी गुमराह करने का प्रयास हुआ, तो आंदोलन और उग्र होगा।
जिला सचिव दीपक साहू ने आरोप लगाया कि छोटे-बड़े खातेदार बनाकर किसानों में फूट डालने की कोशिश की जा रही है। आउटसोर्सिंग कार्यों में भी प्रभावितों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।
प्रदर्शन को वामपंथी नेता नंद कश्यप ने संबोधित किया। आंदोलन में बड़ी संख्या में चारों क्षेत्रों के भूविस्थापित मौजूद रहे।
मुख्य मांगें:
1. 1978–2004 के बीच अर्जित भूमि के सभी खातेदारों को रोजगार।
2. अर्जन के बाद जन्म वाले लंबित प्रकरणों का निराकरण।
3. छोटे खातेदारों को रोजगार।
4. बिलासपुर मुख्यालय व अन्य क्षेत्रों में लंबित फाइलों का त्वरित निपटारा।
5. पुनर्वास और बसावट की लंबित प्रक्रियाओं को पूर्ण करना।
6. आउटसोर्सिंग कार्यों में 100% स्थानीय बेरोजगारों की नियुक्ति।
7. परिसंपत्ति मूल्यांकन में कटौती बंद कर पूर्ण मुआवजा सुनिश्चित करना।
किसान सभा ने साफ कहा—“समाधान नहीं तो आंदोलन और बड़ा होगा।”
Editor – Niraj Jaiswal
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