हाथियों का आतंक बेकाबू: बेहरचुआं, लबेद और कोटमेर में फसलें चौपट, वन विभाग के दावे खोखले

कोरबा। वनमंडल कोरबा में उत्पाती हाथियों पर वन विभाग के नियंत्रण के दावे खोखले साबित हो रहे है। कई गांव में किसानों की धान की फसल को हाथी लगातार चौपट कर रहे है। कुछ इलाकों में लोगों को दिन में यहां-वहां काम करना पड़ रहा है और रातों में भी जागना पड़ रहा है ताकि हाथियों से अपनी और संपत्तियों की रक्षा की जा सके।

हाथियों के एक झुंड ने बांधापाली गांव के किसान भीखाराम राठिया की झोपड़ी को उजाड़ दिया और 20 एकड़ से अधिक धान की फसल को चौपट कर दिया।

करतला रेंज के बेहरचुंआ और केराकछार में घूम रहे 9 और 19 हाथी अब एक साथ हो गए हैं।  किसान भीखाराम ने बताया कि हाथी 2 किलोमीटर दूर जंगल में रहते हैं और भोजन की तलाश में निकलने से पहले चिंघाड़ते हैं। कोटमेर में घूम रहे 10 हाथियों ने तुरींकटरा और सुईआरा में धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है। कोरबा रेंज के दरगा में घूम रहे 10 हाथी चचिया के दो हाथियों के साथ मिल गए हैं।

कुदमुरा रेंज के गीतकुंवारी के लाबेद में एक दंतैल हाथी अकेला घूम रहा है। झुंडों से अलग होने के कारण वन अमले को हाथियों की निगरानी में परेशानी हो रही है। वन विभाग की टीम को सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर हाथियों के झुंड को जंगल में खदेड़ा गया।

किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी और संपत्ति की रक्षा के मामले में अब किसी और पर भरोसा नहीं रहा। क्योंकि वन विभाग हाथी नियंत्रण को लेकर दावे जरूर कर रहा है लेकिन जमीन पर स्थिति कुछ अलग है। दो दशक से भी ज्यादा समय से हमारे सामने कुल मिलाकर मुश्किलें है और समाधान के लिए विकल्प भी हमें ही खोजने पड़ रहे है।