25 वर्षों में जल संसाधन विभाग ने सिंचाई क्षमता को 10,000 से बढ़ाकर 16,071 हेक्टेयर किया, हर खेत तक पानी पहुंचा

कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य की रजत जयंती वर्ष में जल संसाधन विभाग ने 25 वर्षों की विकास यात्रा को चिह्नित करते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य गठन के समय कोरबा जिले में सिंचाई सुविधाएं सीमित थीं, जहां खरीफ-रबी मिलाकर मात्र 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पानी उपलब्ध था। आज यह आंकड़ा बढ़कर 16,071 हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो 6,071 हेक्टेयर की वृद्धि दर्शाता है।

वर्ष 2000 में जिले में 31 जलाशय थे, जो खरीफ में 7,365 हेक्टेयर और रबी में 294 हेक्टेयर सिंचित करते थे।

अब यह संख्या 40 हो चुकी है, जिससे खरीफ में 9,135 हेक्टेयर और रबी में 326 हेक्टेयर क्षेत्र लाभान्वित हो रहा है। व्यपवर्तन परियोजनाएं 7 से बढ़कर 14 हो गईं, जो 5,790 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर कर रही हैं। वहीं, एनिकट योजनाएं शून्य से बढ़कर 23 हो चुकी हैं, जो 1,256 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा प्रदान कर रही हैं।

इन प्रयासों से जलाशयों में 1,802 हेक्टेयर, व्यपवर्तन से 3,013 हेक्टेयर और एनिकट से 1,256 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विकसित हुआ। किसानों को अब वर्षभर सिंचाई उपलब्ध होने से रबी व ग्रीष्म फसलें संभव हुई हैं, जिससे आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।

विभाग ने पाइपलाइन वितरण, सौर पंप और जल पुनर्भरण जैसे आधुनिक उपाय अपनाए, साथ ही जनजागरण अभियान चलाकर जल संरक्षण को बढ़ावा दिया।

राज्य शासन की दूरदर्शी नीतियों के बल पर यह प्रगति संभव हुई, जो ग्रामीण विकास की रीढ़ बनी। रजत जयंती पर यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है, जहां हर खेत हरा-भरा और हर किसान समृद्ध हो।