कोरबा। ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि न्यास अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है और खनन से प्रभावित व विस्थापित परिवारों की अनदेखी कर रहा है। समिति ने इस मुद्दे पर राज्य स्तरीय निगरानी समिति के अध्यक्ष (मुख्य सचिव) और कोरबा कलेक्टर को विस्तृत आवेदन सौंपा है।
समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने बताया कि DMFT का गठन खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 और प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के तहत खनन प्रभावितों के कल्याण के लिए किया गया था। हालांकि, दस वर्षों में न्यास ने प्रभावित परिवारों की आधिकारिक सूची तक तैयार नहीं की। लगभग 4000 करोड़ रुपये की निधि जमा होने के बावजूद, SECL की कोयला खदानों से विस्थापित 15 ग्रामों के पुनर्वासित नगरों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार या प्रशिक्षण की स्थायी सुविधाएं नहीं बनाई गईं।
समिति ने DMFT निधि से निर्मित टूरिस्ट कॉटेज, कन्वेंशन हॉल, सांस्कृतिक भवन और शैक्षणिक संस्थानों के संचालन को गैर-प्रभावित सोसाइटी/समितियों को सौंपने पर आपत्ति जताई है।
इसे छत्तीसगढ़ पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, 1951 का उल्लंघन बताते हुए, समिति ने मांग की है कि इन भवनों का संचालन खनन प्रभावितों की सहकारी संस्थाओं को सौंपा जाए। साथ ही, न्यास नियमों के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति औरआवागमन की व्यवस्था DMFT निधि से करने की मांग की गई है।
सपुरन कुलदीप ने प्रशासन से अनुरोध किया कि खनन प्रभावितों के हित में DMFT निधि से निर्मित भवनों का संचालन प्रभावितों की सहकारी समितियों को हस्तांतरित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि योजना अपने मूल उद्देश्य को प्राप्त कर सके।


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