कोरबा। जिले में धान उपार्जन केंद्रों के सहकारी कर्मचारियों ने अपनी चार प्रमुख मांगों को लेकर फिर से मोर्चा खोल दिया है। आदिवासी सेवा सहकारी समिति कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और धान खरीदी शुरू होने से पहले मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। संघ के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं,तो 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो जाएगी, जिससे धान खरीदी प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
कर्मचारियों ने बताया कि पिछली बार इन्हीं मुद्दों पर 37 दिनों तक हड़ताल की गई थी, जिसमें मंत्रियों ने आश्वासन दिया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी के मद्देनजर कर्मचारी संगठन ने कमर कस ली है।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, प्रदेशभर के करीब 15,000 सहकारी कर्मचारी और 39 उपार्जन केंद्रों के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर इन मांगों से जुड़े हैं।
क्या हैं चार सूत्रीय मांगें?
सुखत की भरपाई: धान खरीदी में सुखत (नमी) की अनुमति बढ़ाने और किसानों को उचित लाभ सुनिश्चित करने की मांग।
उठाव में देरी पर जवाबदारी तय: धान उठाव में हो रही देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और समयबद्ध प्रक्रिया लागू करने की मांग।
आउटसोर्सिंग भर्ती पर रोक: संविदा या आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती बंद कर स्थायी नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग।
वेतन कटौती समाप्त और प्रबंधकीय अनुदान: कर्मचारियों की वेतन में हो रही कटौती तत्काल बंद करने तथा मध्यप्रदेश सरकार की तर्ज पर 3 लाख रुपये का प्रबंधकीय अनुदान प्रदान करने की मांग।
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, “कर्मचारी संगठन की ओर से उठाए गए मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। निश्चित रूप से इस पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।” हालांकि, कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है, जिसमें 12 नवंबर को जिला और संभाग स्तर पर रैली और प्रदर्शन शामिल हैं।
प्रदर्शन में ब्रजभूषण सिंह, चंद्रेश कश्यप, राजकुमार साहू, प्यारेलाल साहू, विनोद भट्ट, अशोक दुबे सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित थे। यह आंदोलन न केवल कोरबा तक सीमित है, बल्कि बेमेतरा, गरियाबंद और अन्य जिलों में भी समान मांगों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। धान खरीदी के सीजन में यह विवाद किसानों के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है, जहां 50 हजार से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया है।
राज्य सरकार को अब जल्द ही हस्तक्षेप करना होगा ताकि फसल खरीदी सुचारू रूप से चले।
Editor – Niraj Jaiswal
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