कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका खदान में कोयला उत्पादन की जल्दबाजी ने एक कर्मचारी की जिंदगी को अपंग कर दिया। दो दिन पहले ब्लास्टिंग के दौरान हुए हादसे में इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के लिए एक्सप्लोसिव वैन में काम करने वाले कर्मचारी के दोनों पैर काटने पड़े। उसका जीवन तो बच गया, लेकिन अपंगता ने उसे और उसके परिवार को अनिश्चित भविष्य में धकेल दिया।
SECL प्रबंधन ने इसे IOCL की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है, लेकिन खदान क्षेत्र में हुई इस घटना ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हादसे की जानकारी के मुताबिक, ब्लास्टिंग साइट के पास खड़ी एक्सप्लोसिव वैन में विस्फोट हुआ। SECL प्रबंधन का दावा है कि वैन का टायर फटने से कर्मचारी झुलस गया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वास्तव में वैन का बूस्टर क्षतिग्रस्त हुआ, जिससे जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट इतना भयंकर था कि उसकी आवाज दूर तक सुनाई दी, और स्थानीय लोगों ने इसे असामान्य रूप से खतरनाक बताया।
घायल कर्मचारी को तुरंत कोरबा के एनकेएच अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी जान बचाने के लिए दोनों पैर काटने पड़े। वर्तमान में उसका इलाज SECL के अनुबंधित अस्पताल में चल रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने हादसे के लिए उत्पादन दबाव को जिम्मेदार ठहराया है। नियमों के अनुसार, एक्सप्लोसिव वैन को ब्लास्टिंग फेस से कम से कम 500 मीटर दूर रखा जाना चाहिए, लेकिन हादसे के दिन यह वैन साइट के बिल्कुल करीब थी। समय से पहले ब्लास्टिंग ने कर्मचारी को खतरे में डाल दिया।
आरोप है कि प्रबंधन ने इसे टायर ब्लास्ट बताकर मामला दबाने की कोशिश की। दीपका पुलिस ने IOCL अधिकारियों से पूछताछ शुरू कर दी है और जांच के आधार पर तथ्यों को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
SECL ने दावा किया कि पीड़ित उनका कर्मचारी नहीं, बल्कि IOCL का कर्मी था, इसलिए उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। लेकिन चूंकि घटना खदान क्षेत्र में हुई, प्रबंधन की भूमिका से इनकार करना मुश्किल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डायरेक्टर जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी (DGMS) इस मामले की जांच करेगा, जिसमें दीपका प्रबंधन के अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।
कर्मचारी यूनियनों और स्थानीय लोगों में इस बात पर गुस्सा है कि क्या यह हादसा भी कागजी कार्रवाई में दब जाएगा, या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
यह हादसा SECL की खदानों में बढ़ती असुरक्षा को उजागर करता है, जहां उत्पादन लक्ष्य हासिल करने की दौड़ में कर्मचारियों की जान जोखिम में डाली जा रही है। पीड़ित परिवार ने उचित मुआवजे और दीर्घकालिक सहायता की मांग की है, जबकि यूनियनें कड़े सुरक्षा नियम लागू करने की वकालत कर रही हैं।
जिला प्रशासन और DGMS से अपेक्षा है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
Editor – Niraj Jaiswal
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