कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) में फर्जी दस्तावेजों से नौकरी हड़पने के मामले छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बार-बार सामने आ रहे हैं। इनमें से कुछ पर कार्रवाई हुई, लेकिन ज्यादातर दबकर रह गए। अब जरहाजेल क्षेत्र की अधिग्रहित जमीन के एक मामले में वास्तविक भूस्वामी जीवित होने के बावजूद फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनाकर किसी और ने SECL में नौकरी हासिल कर ली है। शिकायतकर्ता जानना चाहते हैं कि आखिर उनके नाम पर कौन नौकरी कर रहा है और यह धोखा कैसे हुआ?
यह अविश्वसनीय लेकिन सच्चा मामला रहस्यों से भरा पड़ा है। जांजगीर-चांपा जिले के कोसमुंडा क्षेत्र के निवासी रामरतन (पिता स्व. जेठू) ने एसपी कोरबा को शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने कोरबा नगर निगम से उनका फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र (संख्या: 1396/बी/03) जारी करवाया। इसमें रामरतन की पुत्री नंदनी को आवेदक बताकर मृत्यु की तारीख 02.05.97 दर्ज की गई। आश्चर्यजनक रूप से, नगर निगम ने आरटीआई के तहत रामरतन को ही उनकी ‘मृत्यु’ की जानकारी भेज दी, जो इस फर्जीवाड़े को उजागर करने वाली कड़ी बनी।
रामरतन ने शिकायत में बताया कि उनका आधार कार्ड (संख्या: 451772452040) अभी भी वैध है और वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनकी कृषि भूमि जरहाजेल, कोरबा में थी, जिसे SECL कुसमुंडा क्षेत्र ने कई वर्ष पहले अधिग्रहित कर लिया था। भूमि अधिग्रहण के बदले प्रभावितों को नौकरी का प्रावधान है, लेकिन रामरतन को अब तक कोई लाभ नहीं मिला। उधर, किसी ने नौकरी हासिल करने की मंशा से उनका फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर SECL में उनके नाम पर नौकरी ले ली। रामरतन ने मांग की है कि इस प्रमाणपत्र की जांच हो और अज्ञात आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
पुलिस ने शिकायत पर संज्ञान लिया है और जांच शुरू कर दी है। एसपी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, नगर निगम के रिकॉर्ड, SECL के भर्ती विवरण और आधार कार्ड की प्रामाणिकता की पड़ताल की जाएगी। यदि धोखाधड़ी सिद्ध हुई, तो आरोपी पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है।
यह मामला SECL में भूमि अधिग्रहण से जुड़े घोटालों की लंबी फेहरिस्त में एक और कड़ी जोड़ता है, जहां फर्जी दस्तावेजों से असली हकदारों के अधिकार छीने जा रहे हैं।
क्षेत्रीय निवासियों में इस घटना से रोष फैल गया है। प्रभावित भूस्वामियों ने मांग की है कि SECL और जिला प्रशासन मिलकर पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया लागू करें, ताकि ऐसी धोखाधड़ी रुके और वास्तविक लाभार्थियों को उनका हक मिले। रामरतन का यह संघर्ष न केवल व्यक्तिगत न्याय की लड़ाई है, बल्कि पूरे क्षेत्र के हजारों परिवारों की पीड़ा को आवाज दे रहा है।
Editor – Niraj Jaiswal
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