कोरबा। कोयला, बिजली और सिंचाई परियोजनाओं के लिए विस्थापित हुए लोगों ने सरकार से मौजूदा बाजार मूल्य पर ब्याज सहित मुआवजा देने की मांग की है। भू-विस्थापित संगठन के आलोक शुक्ला और अन्य ने कोरबा में मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्षों पहले उनकी जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन उन्हें अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला, जिससे वे भारी नुकसान में हैं।
उन्होंने बताया कि कोयला उद्योग से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है, लेकिन एसईसीएल की मनमानी और अगले 20 वर्षों में खदानों के बंद होने से लाखों लोगों की आजीविका खतरे में है। न कृषि बचेगी, न कोयला उद्योग। उन्होंने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के उल्लंघन का आरोप लगाया। 20-40 साल पुराने अर्जन मामलों में रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास के मुद्दे लंबित हैं, और कई ग्रामों में पुनर्वास स्थल की व्यवस्था भी नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि जमीन छीनने के लिए बल प्रयोग हो रहा है, जबकि अधिनियम की धारा 101 में स्पष्ट है कि 5 साल तक अनुपयोजित अर्जित भूमि मूल मालिकों को लौटाई जानी चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत झा सहित हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मौजूद थे।
Editor – Niraj Jaiswal
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