कोरबा। कोरबा जिले में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत हरदीबाजार से तरदा तक बनने वाली 27.19 किलोमीटर लंबी टू-लेन सड़क परियोजना भूमि अधिग्रहण विवादों में फंस गई है। 11 ग्रामों से होकर गुजरने वाली इस सड़क के लिए 250 प्रभावित परिवारों को 8 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया है, लेकिन ग्रामीणों ने राशि निर्धारण के आधार पर सवाल उठाते हुए आपत्ति दर्ज की है।
कटघोरा एसडीएम तन्मय खन्ना के कार्यालय से नोटिस जारी कर दस्तावेज जमा करने को कहा गया है, फिर भी ग्राम बिरदा के किसानों ने स्पष्ट किया कि उन्हें मुआवजा तय करने का कोई आधार नहीं बताया गया।
सड़क निर्माण तीन चरणों में हो रहा है, जिसमें तरदा- हरदीबाजार का 13 किलोमीटर हिस्सा शामिल है।
अवार्ड पारित होने के बाद मुआवजा वितरण शुरू हो चुका है, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत है कि अधिग्रहण के समय कोई सूचना नहीं दी गई। कलेक्टोरेट पहुंचे प्रभावितों ने मांग की है कि मुआवजा भारतमाला परियोजना की तर्ज पर तय हो और जमीन का मूल्यांकन बाजार दर के आधार पर किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि उचित मुआवजा न मिलने पर न्यायालय का रुख करेंगे।
इस विवाद के कारण सड़क निर्माण पर संकट मंडरा रहा है।
90 प्रतिशत मुआवजा वितरण पूरा होने बिना निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती। पीडब्ल्यूडी ने राशि भू-अर्जन अधिकारी, कटघोरा के पास जमा कर दी है, लेकिन ठेका कंपनी ने जमीन न मिलने पर काम रोक दिया था। नवंबर 2024 में ठेका समाप्त हो चुका है, जबकि सर्वमंगला से इमलीछापर के बीच 500 मीटर सड़क अभी अधूरी है। तीन चरणों का एक साथ काम होने से नई निविदा भी अटकी हुई है।
कार्यपालन अभियंता पीडब्ल्यूडी, जी.आर. जांगड़े ने बताया कि अधिग्रहण पूरा होने के बाद ही नई निविदा जारी की जाएगी। मुआवजा राशि प्रशासन के पास जमा है और शेष प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी। 11 महीने पहले हुई निविदा निरस्त के बाद यह विवाद निर्माण को और लंबा खींच सकता है। ग्रामीणों की मांगों का समाधान न होने पर परियोजना में और देरी की आशंका है।
Editor – Niraj Jaiswal
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