छत्तीसगढ़ में POSH Act के तहत सख्ती: आंतरिक परिवाद समिति गठन न करने वाले कार्यालयों पर होगी कड़ी कार्रवाई

रायपुर/कोरबा।छत्तीसगढ़ शासन ने कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित कानून, महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कड़े कदम उठाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश के बाद उठाया गया है, जिसके तहत राज्य के सभी अशासकीय कार्यालयों में आंतरिक परिवाद समिति (Internal Complaints Committee – ICC) का गठन अनिवार्य किया गया है।

मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने श्रम विभाग के सचिव को जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि सर्वोच्च न्यायालय के 12 अगस्त 2025 के आदेश के अनुपालन में, राज्य के सभी निजी क्षेत्र के कार्यालयों का सर्वेक्षण कर ICC के गठन को सुनिश्चित किया जाए। इस सर्वेक्षण के लिए 6 सप्ताह की समय-सीमा निर्धारित की गई है, जो 12 अगस्त 2025 से शुरू हो चुकी है। जिन कार्यालयों में POSH Act के प्रावधानों के अनुसार समिति का गठन नहीं हुआ है, उनके खिलाफ विधि अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय का आदेश और उसका आधार
यह निर्देश सर्वोच्च न्यायालय के प्रकरण क्रमांक W.P.(C) No. 1244/2017 “Aureliano Fernandes Vs State of Goa and others” में 12 अगस्त 2025 को पारित आदेश के संदर्भ में जारी किया गया है। इस आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि POSH Act के तहत 10 या अधिक कर्मचारियों वाले सभी निजी कार्यालयों में ICC का गठन अनिवार्य है। यह समिति कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए एक प्रभावी तंत्र के रूप में कार्य करती है।

आदेश के अनुसार, मुख्य श्रम आयुक्त को श्रम आयुक्तों के माध्यम से सभी निजी क्षेत्र के कार्यालयों का सर्वेक्षण करवाने और इसकी जानकारी जिला कलेक्टरों के माध्यम से मुख्य सचिव को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मुख्य सचिव इस जानकारी को संकलित कर सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे। यह सर्वेक्षण प्रपत्र 01 के प्रारूप में किया जाएगा, जिसमें कार्यालयों द्वारा ICC गठन की स्थिति और अनुपालन की जानकारी शामिल होगी।


POSH Act और ICC की संरचना
POSH Act की धारा 4 के अनुसार, 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक कार्यस्थल पर नियोजक को लिखित आदेश के माध्यम से आंतरिक परिवाद समिति (ICC) का गठन करना होगा। इस समिति की संरचना निम्नलिखित होनी चाहिए:

पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer): यह कार्यस्थल पर वरिष्ठ स्तर की एक महिला कर्मचारी होनी चाहिए।

दो कर्मचारी सदस्य: ये कर्मचारी महिलाओं के मुद्दों और समस्याओं के प्रति संवेदनशील और प्रतिबद्ध होने चाहिए।

एक बाहरी सदस्य: यह किसी गैर-सरकारी संगठन (NGO) या ऐसे व्यक्ति से होना चाहिए, जो महिलाओं के अधिकारों और मुद्दों के प्रति प्रतिबद्ध हो।

यह समिति कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की शिकायतों की जांच और निवारण के लिए जिम्मेदार होती है, ताकि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सके।

कार्यवाही और जिम्मेदारियां
मुख्य सचिव के आदेश के बाद, श्रमायुक्त कार्यालय, रायपुर ने सभी सहायक श्रमायुक्तों, श्रम पदाधिकारियों, उप संचालकों, और सहायक संचालकों (औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा) को इस आदेश के पालन के लिए पत्र जारी किया है।

इन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी अशासकीय कार्यालयों और संस्थानों का सर्वेक्षण करें। इस सर्वेक्षण में यह जांचा जाएगा कि कार्यालयों ने POSH Act के प्रावधानों के अनुसार ICC का गठन किया है या नहीं।

सर्वेक्षण का कार्य जिला कलेक्टरों के साथ समन्वय में किया जाएगा। जिन कार्यालयों में ICC का गठन नहीं हुआ है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। यह कार्रवाई POSH Act के तहत निर्धारित दंडात्मक प्रावधानों के अनुसार होगी, जिसमें जुर्माना और अन्य कानूनी परिणाम शामिल हो सकते हैं।

समय-सीमा और अनुपालन
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, यह सर्वेक्षण 12 अगस्त 2025 से शुरू होकर 6 सप्ताह के भीतर, यानी 23 सितंबर 2025 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, इस प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। सर्वेक्षण की रिपोर्ट जिला कलेक्टरों के माध्यम से मुख्य सचिव को भेजी जाएगी, जो इसे सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे।

महत्व और प्रभाव
यह कदम कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। POSH Act का उद्देश्य कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न को रोकना, इसकी शिकायतों का त्वरित निवारण करना और पीड़ितों को न्याय प्रदान करना है। ICC के गठन से न केवल कानूनी अनुपालन सुनिश्चित होगा, बल्कि यह कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और समावेशी वातावरण को बढ़ावा देगा।

छत्तीसगढ़ शासन का यह कदम निजी क्षेत्र के कार्यालयों को भी यह संदेश देता है कि लैंगिक उत्पीड़न के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। गैर-अनुपालन करने वाले कार्यालयों को न केवल कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

छत्तीसगढ़ शासन और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राज्य के सभी अशासकीय कार्यालय POSH Act के प्रावधानों का पालन करें। सभी संबंधित अधिकारियों और कार्यालयों को इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता है, ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित हो सके।