नेताओं के खोखले वादों में फंसा अमहवा पचरा, बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर

कोरबा। पोंडी-उपरोड़ा विकासखंड का आश्रित ग्राम अमहवा पचरा पंचायत आज़ादी के सात दशक बाद भी बुनियादी सुविधाओं से दूर है। करीब 350 की आबादी वाला यह गांव चारों ओर से नदी-नाले और पहाडिय़ों से घिरा है। बरसात आते ही गांव पूरी तरह से टापू बन जाता है।

आवागमन की सुविधा न होने से लोग कई-कई दिनों तक गांव में कैद रहते हैं। न बाजार पहुंच पाते हैं, न बच्चे स्कूल जा पाते। कई बार छात्र-छात्राएं स्कूल तो चले जाते हैं, लेकिन पानी बढऩे पर लौट नहीं पाते और उन्हें परिचितों के घर शरण लेनी पड़ती है। बटोही नदी विद्यार्थियों के साथ-साथ लोगों के रास्ते को रोकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि दशकों से सडक़, पुल-पुलिया और शिक्षा जैसी सुविधाओं का अभाव उनकी ज़िंदगी को कठिन बना रहा है। कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दलों पर लोगों ने उपेक्षा का आरोप लगाया।

गांववालों ने बताया कि नेता केवल चुनाव के वक्त वादे करते हैं और फिर भूल जाते हैं।

पिछली बार ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार तक की चेतावनी दी थी। उनका कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, बरसात में मुसीबतें हर साल यूँ ही बढ़ती रहेंगी।