कुसमुंडा फोरलेन की जर्जर सड़क बनी मुसीबत, कोल डस्ट और गड्ढों ने बढ़ाई परेशानी

कोरबा जिले के कुसमुंडा क्षेत्र में अधूरी फोरलेन सड़क स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। बारिश में गड्ढों में भरा पानी और अब बारिश थमने के बाद उड़ता कोल डस्ट और मिट्टी का गुबार क्षेत्रवासियों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। पिछले कई सालों से यह स्थिति बनी हुई है, और हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

गत 24 अगस्त को कुसमुंडा के लोगों ने सड़क की जर्जर स्थिति और गड्ढों में भरे गंदे पानी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। स्थानीय लोगों ने गड्ढों में भरे पानी में स्नान कर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ। बारिश थमने के बाद अब सड़क पर जमा कोल डस्ट और मिट्टी हवा में उड़कर आसपास के मकानों और दुकानों तक पहुंच रही है, जिससे दीवारें काली हो गई हैं और हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कोल डस्ट के कारण हर 4-5 घंटे में घरों में झाड़ू लगानी पड़ रही है। सड़क पर गड्ढों में कोयले का चूर्ण भरा गया है, जो बारिश में कीचड़ और अब सूखने पर धूल बनकर उड़ रहा है। इससे न केवल निवासियों बल्कि राहगीरों को भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है। सड़क किनारे के मकान और दुकानें धूल से प्रभावित हैं, जिससे व्यवसायियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

क्षेत्रवासियों ने जनप्रतिनिधियों पर उदासीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों ने सड़क की समस्या पर ध्यान नहीं दिया। लोग बताते हैं कि जनप्रतिनिधि चमचमाती गाड़ियों में इस सड़क से गुजरते हैं, लेकिन इसकी सुध लेने की जहमत नहीं उठाते। आंदोलन के बाद भी प्रशासन की ओर से केवल खानापूर्ति की गई है, और कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

कुसमुंडा के लोग अब सड़क की मरम्मत और पूर्ण निर्माण की मांग कर रहे हैं। उनकी शिकायत है कि यह सड़क उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है, और प्रशासन की अनदेखी से उनकी परेशानियां और बढ़ रही हैं। स्थानीय लोग चेतावनी दे रहे हैं कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आगे और बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।