उपसरपंच की रहस्यमयी गायब होने की घटना: 36 घंटे बाद भी नहीं मिला सुराग, ग्रामीणों ने किया चक्का जाम

सक्ती।छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के ग्राम पंचायत करही से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां उपसरपंच महेंद्र बघेल 6 सितंबर की रात से रहस्यमयी तरीके से लापता हैं। 36 घंटे बीत जाने के बावजूद पुलिस को उनका कोई सुराग नहीं मिला है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश और अनहोनी की आशंका बढ़ गई है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।

6 सितंबर की रात से लापता

जानकारी के अनुसार, उपसरपंच महेंद्र बघेल 6 सितंबर की रात 10 बजे से अपने घर नहीं लौटे। परिजनों ने उनकी तलाश में काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर बिर्रा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 से 7 संदिग्धों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ शुरू की। हालांकि, 36 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस को महेंद्र बघेल का कोई पता नहीं चल सका है।

ग्रामीणों में आक्रोश, चक्का जाम

लापता उपसरपंच की खोज में पुलिस की नाकामी से नाराज ग्रामीणों ने अनहोनी की आशंका जताते हुए बिर्रा चौक पर चक्का जाम कर दिया। इस प्रदर्शन ने स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा कर दिया। हालांकि, पुलिस की समझाइश के बाद ग्रामीणों ने चक्का जाम समाप्त कर दिया, लेकिन उनकी मांग है कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द उपसरपंच का पता लगाए।

पुलिस की जांच और सवाल

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है। हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं, क्योंकि इतने समय बाद भी कोई प्रगति नहीं दिख रही। ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि उपसरपंच के गायब होने के पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।

सामाजिक और प्रशासनिक चिंता

इस घटना ने स्थानीय समुदाय में दहशत और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि का इस तरह रहस्यमयी ढंग से गायब होना न केवल चिंताजनक है, बल्कि क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है। प्रशासन और पुलिस पर दबाव बढ़ रहा है कि इस गुत्थी को जल्द से जल्द सुलझाया जाए।

सक्ती जिले के करही ग्राम पंचायत के उपसरपंच महेंद्र बघेल के रहस्यमयी ढंग से गायब होने की घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। पुलिस की जांच और ग्रामीणों की चिंता के बीच यह देखना बाकी है कि इस मामले का खुलासा कब और कैसे होता है। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करे ताकि परिजनों और ग्रामीणों को जवाब मिल सके और क्षेत्र में शांति बहाल हो।