छत्तीसगढ़ में लड़कियों की शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति: बोर्ड परीक्षाओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन, साक्षरता दिवस पर विशेष

रायपुर।अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में लड़कियों की शिक्षा में आई उल्लेखनीय प्रगति सुर्खियों में है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले पांच वर्षों में लड़कियों ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में लगातार लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया है। यह न केवल अकादमिक सफलता का प्रतीक है, बल्कि समाज में उनकी स्थिति को सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।

बोर्ड परीक्षाओं में लड़कियों का दबदबा

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत लड़कों से औसतन 6 से 9 प्रतिशत अधिक रहा है। वर्ष 2024 में 10वीं बोर्ड में लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 79.35% रहा, जबकि लड़के 71.12% पर सीमित रहे। 12वीं में भी लड़कियों ने 83.72% के साथ लड़कों (76.91%) को पीछे छोड़ा। 2023 में 10वीं में लड़कियां 79.16% और लड़के 70.26%, जबकि 12वीं में लड़कियां 83.84% और लड़के 75.36% रहे। 2022 में भी यही रुझान रहा, जहां 10वीं में लड़कियां 78.84% और लड़के 69.07%, तथा 12वीं में लड़कियां 81.15% और लड़के 77.03% रहे। 2021 में कोरोना के कारण सभी विद्यार्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया गया, लेकिन 12वीं में लड़कियां 98.06% और लड़के 96.06% पर थे। 2020 में 10वीं में लड़कियां 76.28% और लड़के 70.53% रहे।

लड़कियों की मेहनत और अनुशासन का परिणाम

रायपुर के दानी गर्ल्स स्कूल के प्रिंसिपल हितेश दीवान ने बताया कि लड़कियों की निरंतर मेहनत, अनुशासन और परिवारों का सहयोग उन्हें आगे रखता है। उनकी पढ़ाई में नियमितता और समय प्रबंधन लड़कों की तुलना में बेहतर माना जाता है। यह रुझान न केवल शैक्षिक क्षेत्र में, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास में भी सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।

साक्षरता दिवस: नया अर्थ, नई परिभाषा

हर साल 8 सितंबर को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का महत्व आज केवल अक्षर पढ़ने तक सीमित नहीं है। 1966 में यूनेस्को द्वारा शुरू किए गए इस दिवस का उद्देश्य निरक्षरता को खत्म करना और शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देना था। आज साक्षरता का मतलब मोबाइल और कंप्यूटर चलाने, बैंकिंग और वित्तीय समझ, सही-गलत खबरों की पहचान और भावनात्मक बुद्धिमत्ता तक विस्तारित हो गया है। 2025 में साक्षरता का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जो न केवल पढ़-लिख सके, बल्कि सोच-समझकर समाज में योगदान दे सके।

लड़कियों की शिक्षा में यह प्रगति छत्तीसगढ़ के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यदि यह रुझान जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में राज्य में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण में और वृद्धि होगी। साक्षरता दिवस के अवसर पर यह उपलब्धि समाज को एक प्रेरणादायक संदेश दे रही है।