कोरबा।बिलासपुर हाई कोर्ट ने कटघोरा नगर पालिका अध्यक्ष राज जायसवाल को एक जांच मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। उनके साथ आशुतोष मिश्रा और आदिवासी विकास विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर कुश देवांगन को भी कोर्ट से राहत मिली है। यह मामला तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर के कार्यकाल में हुए कार्यों में अनियमितता से संबंधित है, जिसमें सिविल लाइन थाना में गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
जांच में गड़बड़ी के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर
तत्कालीन सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग, कोरबा माया वारियर के कार्यकाल के दौरान कराए गए कुछ कार्यों की जांच में अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके बाद राज जायसवाल, चार फर्मों के संचालकों और विभागीय कर्मचारियों के खिलाफ सिविल लाइन थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी। गैर-जमानती धाराओं के तहत दर्ज इस मामले में राज जायसवाल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दिया था।
हाई कोर्ट में पेश किए गए तथ्य और तर्क
राज जायसवाल की ओर से उनके अधिवक्ता ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अग्रिम जमानत आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में तमाम तथ्यों को रखा गया और तर्क दिए गए। कोर्ट ने तथ्यों का अवलोकन और अधिवक्ता के तर्कों पर विचार करने के बाद राज जायसवाल, आशुतोष मिश्रा और कुश देवांगन को अग्रिम जमानत प्रदान की।
मामले में मिली बड़ी राहत
हाई कोर्ट के इस फैसले से राज जायसवाल और अन्य दो लोगों को बड़ी राहत मिली है। यह मामला कोरबा और कटघोरा में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें नगर पालिका अध्यक्ष जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल हैं। कोर्ट के इस निर्णय से मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।
Editor – Niraj Jaiswal
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