कोरबा।रोगदा गांव के किसान राम प्यारे पटेल अपनी पैतृक 25 डिसमिल जमीन को सरकारी तालाब के निर्माण में समाहित किए जाने के बाद पिछले 20 साल से उसे वापस पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। सोमवार को आयोजित जन दर्शन में एक बार फिर अपनी शिकायत लेकर पहुंचे राम प्यारे ने बताया कि लगभग 45 वर्ष पहले गांव में एक सरकारी तालाब बनाया गया था, जिसमें उनकी जमीन को बिना किसी सूचना या सहमति के शामिल कर लिया गया।
राम प्यारे के अनुसार, उस समय उनकी उम्र कम थी और न तो उन्हें और न ही उनके परिजनों को इसकी जानकारी दी गई। नियमानुसार न तो जमीन को सुरक्षित रखने के लिए कोई पार बनाई गई और न ही कोई अन्य उपाय किया गया।
इसके चलते उनकी 25 डिसमिल जमीन तालाब में समाहित हो गई। पिछले दो दशकों से वह अपनी जमीन वापस पाने के लिए प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं और कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला।
राम प्यारे ने जन दर्शन में अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा, “सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार से कोई कैसे संघर्ष करे?” उनकी इस शिकायत ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर किया है।
किसान की इस लड़ाई को लेकर ग्रामीणों में भी चर्चा है, और अब इस मामले में प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
Editor – Niraj Jaiswal
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