कोरबा।साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के दीपका खदान क्षेत्र में प्रतिदिन होने वाली ब्लास्टिंग को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासियों और सूत्रों का आरोप है कि ब्लास्टिंग प्रक्रिया मानकता के अनुरूप नहीं हो रही है, जिसके कारण आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके साथ ही बारूद की आपूर्ति और खपत में अनियमितताओं तथा भारी वाहनों की प्रक्रिया में संदिग्ध गतिविधियों की चर्चा ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
ब्लास्टिंग से स्थानीय निवासियों को नुकसान
सूत्रों के अनुसार, दीपका खदान क्षेत्र में ब्लास्टिंग के लिए छह एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो प्रतिदिन लगभग 2000 टन बारूद की आपूर्ति करती हैं। इस प्रक्रिया की देखरेख संबंधित विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत की जाती है, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि ब्लास्टिंग मानकों का पालन नहीं हो रहा है। हरदीबाजार और आसपास के क्षेत्रों में बसे घरों की दीवारों में दरारें पड़ रही हैं, और लगातार होने वाले कंपन और झटकों से ढांचों को नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसकी वजह से उन्हें आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।
बारूद आपूर्ति और खपत में अनियमितताओं का आरोप
ब्लास्टिंग प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले बारूद की आपूर्ति और खपत को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि प्रति टन बारूद पर करीब 145 रुपए का अंतर बनाया जा रहा है, जिसके कारण वास्तविक खपत और कागजों में दर्ज आंकड़ों में भिन्नता का संदेह पैदा हो रहा है। यह अनियमितता प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है और इसकी जांच की मांग को बल देती है।
भारी वाहनों की प्रक्रिया पर संदेह
बारूद की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले भारी वाहनों की प्रक्रिया भी विवादों के घेरे में है। सूत्रों के अनुसार, जब ये वाहन खदान क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, तो उनकी पानी की टंकियां (800 से 1000 लीटर क्षमता) पूरी तरह भरी होती हैं। लेकिन बारूद खाली करने के बाद जब वाहन वापस लौटते हैं और दोबारा वजन किया जाता है, तो टंकी खाली होने के कारण वजन में अंतर आ जाता है। इस प्रक्रिया में संदिग्ध गतिविधियों की आशंका जताई जा रही है, जिसे स्थानीय लोग एक बड़े “खेल” का हिस्सा मान रहे हैं।
स्थानीय निवासियों और संगठनों में असंतोष
लगातार हो रही ब्लास्टिंग और उससे होने वाले नुकसान ने स्थानीय निवासियों में असंतोष को बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रबंधन पर्यावरण नियमों और ब्लास्टिंग मानकों का पालन करने में विफल रहा है, जिससे उनके जीवन और संपत्ति पर खतरा मंडरा रहा है। यदि इस मामले में जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो स्थानीय निवासियों और संगठनों द्वारा आंदोलन की चेतावनी दी जा रही है।
एसईसीएल दीपका खदान में ब्लास्टिंग प्रक्रिया, बारूद आपूर्ति, और भारी वाहनों की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। स्थानीय निवासियों की शिकायतें और अनियमितताओं के आरोपों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।
प्रबंधन को इन मुद्दों पर तत्काल ध्यान देना होगा और पारदर्शी जांच के जरिए स्थिति को स्पष्ट करना होगा, ताकि स्थानीय समुदाय का विश्वास बहाल हो सके। अन्यथा, यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है।
Editor – Niraj Jaiswal
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