60 रुपए के लिए मारपीट: फोन-पे पर 6 रुपए भेजने से शुरू हुआ विवाद, पुलिस जांच में जुटी

कोरबा।छत्तीसगढ़ में अपराध और हिंसक वारदातों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोरबा जिले के बरपाली क्षेत्र के राजाडाही गांव में महज 60 रुपए के पेमेंट को लेकर हुआ विवाद मारपीट तक जा पहुंचा। यह घटना छोटी-छोटी बातों पर बढ़ते झगड़ों और मोबाइल पेमेंट से जुड़े विवादों की गंभीरता को दर्शाती है।

6 रुपए के पेमेंट से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, राजाडाही गांव में रहने वाला अलकसियूश कुजुर अपने घर पर किराना दुकान चलाता है। बुधवार की शाम गांव का ही विनोद खलखो उसकी दुकान पर सामान खरीदने पहुंचा। विनोद ने करीब 60 रुपए का सामान खरीदा, लेकिन पेमेंट के समय उसने फोन-पे के जरिए सिर्फ 6 रुपए भेजे। कुछ देर बाद जब दुकानदार ने अपना मोबाइल चेक किया, तो उसे केवल 6 रुपए क्रेडिट होने का मैसेज मिला। इसके बाद अलकसियूश ने विनोद से बाकी 54 रुपए की मांग की, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया।

गाली-गलौज और मारपीट का दौर

दुकानदार का आरोप है कि बाकी पैसे मांगने पर विनोद ने उसके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और बात इतनी बढ़ गई कि उसने मारपीट शुरू कर दी। शोरगुल सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। इस घटना ने गांव में हड़कंप मचा दिया।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना के बाद पीड़ित दुकानदार अलकसियूश ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है और मामले की तह तक जाया जाएगा।

ग्रामीणों में चिंता, छोटी बातों पर बढ़ते झगड़े

ग्रामीणों का कहना है कि राजाडाही गांव में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होना अब आम हो गया है। लेकिन मोबाइल पेमेंट जैसे आधुनिक साधनों को लेकर विवाद का यह मामला नया और चिंताजनक है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक तनाव को बढ़ा रही हैं और इसे रोकने के लिए जागरूकता और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

कोरबा जिले में 60 रुपए के मामूली विवाद का मारपीट तक पहुंचना न केवल सामाजिक माहौल की नाजुक स्थिति को दर्शाता है, बल्कि डिजिटल पेमेंट के बढ़ते उपयोग के बीच नई चुनौतियों को भी उजागर करता है। पुलिस की जांच से इस मामले में स्पष्टता आने की उम्मीद है, लेकिन यह घटना समाज में बढ़ती असहिष्णुता और छोटी बातों पर हिंसा की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।