कोरबा।छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र के एक दंपती के बीच 14 साल से चले आ रहे वैवाहिक विवाद का अंत करते हुए पति की तलाक की अपील को स्वीकार कर लिया। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कटघोरा फैमिली कोर्ट के 2017 के फैसले को पलटते हुए पति को तलाक की डिक्री प्रदान की।
कोर्ट ने पत्नी और उनकी बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पति को 15 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता छह महीने के भीतर देने का निर्देश दिया।
यह मामला 2010 में हुई शादी से शुरू हुआ, जब एसईसीएल में माइनिंग सरदार के रूप में कार्यरत पति और उनकी पत्नी के बीच बेटी के जन्म के बाद मतभेद उभरे। पति ने दावा किया कि पत्नी ने वैवाहिक जिम्मेदारियों से इनकार किया और अलग रहने का दबाव बनाया।
वहीं,पत्नी ने ससुराल पक्ष पर 5 लाख रुपये दहेज की मांग और उत्पीड़न का आरोप लगाया। पत्नी ने पति और उनके परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण के मामले दर्ज किए, लेकिन 2019 में सेशन कोर्ट ने सभी आपराधिक आरोपों से पति और उनके परिवार को बरी कर दिया।
पति ने 2015 में तलाक के लिए कटघोरा फैमिली कोर्ट में अर्जी दायर की थी, जिसे 2017 में खारिज कर दिया गया।
हाई कोर्ट में अपील पर सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने पाया कि 2011 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं और पत्नी द्वारा दर्ज शिकायतों ने पति को मानसिक यातना पहुंचाई।
कोर्ट ने माना कि बिना उचित कारण के वैवाहिक जीवन से दूरी बनाए रखना क्रूरता के समान है और पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं है। इस आधार पर तलाक को मंजूरी दी गई और पत्नी को गुजारा भत्ता प्रदान करने का आदेश दिया गया। इस फैसले ने इस लंबे और विवादास्पद वैवाहिक रिश्ते को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया।
Editor – Niraj Jaiswal
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