निगम की FIR कार्रवाई पर चेम्बर ने संभाली मध्यस्थ की भूमिका

व्यापारियों पर सीधे FIR से पहले नोटिस देकर पक्ष रखने का मौका देने आयुक्त से आग्रह

कोरबा। शहर में पौधारोपण और स्वच्छता अभियान के दौरान कार्रवाई को लेकर नगर निगम के अधिकारी- कर्मचारियों और व्यापारियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच जिला चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने मध्यस्थता की पहल की है।

चेम्बर के महामंत्री नरेंद्र अग्रवाल ने निगम आयुक्त को पत्र भेजकर व्यापारियों के विरुद्ध छोटी घटनाओं में सीधे एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

चेम्बर ने कहा है कि शहर की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता अभियानों में व्यापारी वर्ग हमेशा निगम के साथ सहयोग करता रहा है और आगे भी सहयोग करता रहेगा। ऐसे में छोटी-छोटी घटनाओं में सीधे एफआईआर दर्ज होने से व्यापारियों में चिंता और तनाव का माहौल बन रहा है।

FIR से पहले नोटिस देकर पक्ष सुनने की मांग
चेम्बर ने आयुक्त से आग्रह किया है कि भविष्य में किसी व्यापारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने से पहले उसे नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।

यदि कोई त्रुटि हुई है तो उसे सुधारने का उचित अवसर भी दिया जाना चाहिए। चेम्बर का मानना है कि इससे अनावश्यक विवादों से बचने के साथ निगम और व्यापारी वर्ग के बीच विश्वास और सहयोग की भावना मजबूत होगी।

स्वच्छता अभियान में व्यापारी भी भागीदार
पत्र में चेम्बर ने कहा कि व्यापारी वर्ग शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए निगम के स्वच्छता, वृक्षारोपण और जनजागरूकता अभियानों में लगातार सहयोग करता रहा है।

कोरबा में निगम और व्यापारियों के बीच लंबे समय से सौहार्दपूर्ण एवं सहयोगात्मक संबंध रहे हैं।

कानून का पालन भी जरूरी, संवाद से समाधान पर जोर
चेम्बर ने स्पष्ट किया कि शहर की व्यवस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए नियमों का पालन कराया जाना जरूरी है। व्यापारियों को भी नियमों का पालन करते हुए निगम के अभियानों में सहयोग करना चाहिए। वहीं, कार्रवाई की प्रक्रिया में संवाद और सुधार का अवसर दिया जाना भी महत्वपूर्ण है।

चेम्बर का कहना है कि छोटी गलती पर पहले समझाइश, नोटिस और सुधार का अवसर दिया जा सकता है, जबकि गंभीर या जानबूझकर किए गए उल्लंघन पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही किसी अधिकारी-कर्मचारी पर राजनीतिक पहचान या दबाव का इस्तेमाल कर विवाद बढ़ाना भी उचित नहीं है।

जिला चेम्बर की इस पहल को निगम और व्यापारी वर्ग के बीच बढ़ते तनाव को कम करने तथा कानूनी कार्रवाई के साथ संवाद का रास्ता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। चेम्बर ने निगम आयुक्त से अपने अनुरोध पर सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपेक्षा जताई है।