कोरबा जिले के नेहरू नगर कुआभट्टा क्षेत्र में भादो महीने की लगातार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। बीती रात हुई मूसलधार बारिश ने अंजनी कुंज हनुमान मंदिर के आसपास की निचली बस्तियों को तालाब में तब्दील कर दिया। बरसाती पानी का तेज बहाव घरों के भीतर तक घुस गया, जिससे खाने-पीने का सामान, कपड़े, और अन्य जरूरी वस्तुएं खराब हो गईं। स्थानीय निवासियों को पूरी रात बच्चों के साथ जागकर और पानी निकालने की मशक्कत में गुजारनी पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जलभराव की समस्या नई नहीं है। हर साल मानसून के दौरान यह स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। निवासियों ने बताया कि उन्होंने पूर्व और वर्तमान महापौर, नगर पालिका प्रशासन, और अन्य जनप्रतिनिधियों को कई बार शिकायतें दीं और पत्राचार भी किया, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले। एक स्थानीय निवासी, रमेश साहू ने कहा, “हर साल यही तमाशा होता है। हमारी शिकायतों की पावती तो मिलती है, लेकिन कार्रवाई शून्य। अब हम स्थायी समाधान चाहते हैं।”
लोगों की नाराजगी का मुख्य कारण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता है। निवासियों का कहना है कि चुनावी दौर में बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और होती है। एक अन्य निवासी, शांति देवी ने बताया, “हमने महापौर और अधिकारियों को बार-बार इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। नालियों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जाता।” लोगों ने यह भी बताया कि न केवल कुआभट्टा, बल्कि कोरबा के अन्य हिस्सों में भी बारिश के दौरान ऐसी समस्याएं आम हैं।
जलभराव के कारण लोगों को अपने घरों से पानी निकालने के लिए कूलर मोटर और टुल्लू पंप का सहारा लेना पड़ा। घरों के आंगन और कमरों में पानी भरने से दीवारों में नमी और भविष्य में ढांचागत नुकसान का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने बताया, “रात भर पानी निकालने में लगे रहे। बच्चों को स्कूल भेजने में दिक्कत हुई और रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हुए। सबसे बड़ा नुकसान उन सामानों का हुआ, जो पानी में खराब हो गए। इसकी भरपाई कौन करेगा?”
निवासियों ने मांग की है कि जलभराव की समस्या के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। उनके सुझावों में नालियों और नालों की नियमित सफाई, उचित जल निकासी व्यवस्था, और बरसाती पानी को जमीन में अवशोषित करने के लिए प्रणाली विकसित करना शामिल है। एक निवासी, अनिता वर्मा ने कहा, “जब सरकार सुशासन की बात करती है, तो हमारे क्षेत्र में यह कब दिखेगा? हम हर साल पानी में डूबते हैं, और प्रशासन केवल आश्वासन देता है।”
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि वे जलभराव की समस्या से अवगत हैं और इसे हल करने के लिए प्रयासरत हैं। हाल ही में कुछ क्षेत्रों में नालियों की सफाई का काम शुरू किया गया है, लेकिन भारी बारिश के कारण काम में देरी हुई है। एक अधिकारी ने बताया, “हम जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन लगाकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे।” हालांकि, स्थानीय लोग इस तरह के बयानों को “पुराना राग” मानते हैं और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कोरबा के नेहरू नगर कुआभट्टा क्षेत्र में जलभराव की समस्या ने स्थानीय प्रशासन की तैयारियों और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते नालियों की सफाई और जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए, तो इस समस्या से बचा जा सकता है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस बार लोगों की मांगों पर अमल कर पाएगा, या यह समस्या अगले मानसून में फिर से सिर उठाएगी।
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