कोरबा।उत्तर भारत में हो रही झमाझम बारिश का असर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले पर भी पड़ रहा है। बुधवार रात से शुरू हुई मूसलधार बारिश ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। नाले और नदियां उफान पर हैं, सड़कों पर जलभराव की स्थिति है, और कई घरों में पानी घुस गया है। इस प्राकृतिक आपदा ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है।
निचले इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी
कोरबा के निचले इलाकों जैसे सीतामणी, मानिकपुर, रवि शंकर नगर, और खरमोरा में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। सड़कों पर पानी जमा होने से आवागमन ठप हो गया है, और कई घरों में पानी घुसने से लोगों का सामान खराब हो रहा है। स्थानीय निवासी रमेश साहू ने बताया, “हर साल बारिश में यही हाल होता है। नालियों की सफाई नहीं होती, और जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। हमारा सामान बर्बाद हो रहा है, और प्रशासन केवल आश्वासन देता है।”
स्कूल बस फंसी, बच्चों को परेशानी
गुरुवार सुबह रवि शंकर शुक्ला नगर में एक स्कूल बस जलभराव वाली सड़क पर फंस गई। बस में सवार कई बच्चों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, जिसके कारण उन्हें स्कूल पहुंचने में देरी हुई। एक अभिभावक, शांति देवी ने कहा, “बच्चों की सुरक्षा को लेकर हम चिंतित हैं। सड़कों पर इतना पानी है कि बसें और वाहन फंस रहे हैं। प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।” इस घटना ने जलभराव की समस्या की गंभीरता को और उजागर कर दिया।
मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में यातायात बाधित
मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में भी भारी जलभराव के कारण सड़कों पर पानी जमा हो गया, जिससे वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। कई लोग घंटों जाम में फंसे रहे। एक स्थानीय दुकानदार, राजेश वर्मा ने बताया, “यहां हर बारिश में सड़कें नदी बन जाती हैं। मरीजों और जरूरी सेवाओं के लिए भी यह बड़ी समस्या है। प्रशासन को जल्द से जल्द जल निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए।”
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बुरा हाल
कोरबा के ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक है। छोटे-बड़े नाले उफान पर होने से गांवों के बीच संपर्क मार्ग कट गए हैं। किसानों को अपनी फसलों की चिंता सता रही है, क्योंकि लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जिससे धान और अन्य फसलों को नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है। किसान रामलाल यादव ने कहा, “हमारी मेहनत पानी में बह रही है। अगर बारिश ऐसे ही जारी रही, तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।”
जल निकासी की कमी से बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था इस संकट का मुख्य कारण है। हर साल मानसून में जलभराव की समस्या दोहराई जाती है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। एक निवासी, अनिता गुप्ता ने कहा, “नालियों की नियमित सफाई और बेहतर जल निकासी प्रणाली की जरूरत है। हर साल हमें एक ही समस्या का सामना करना पड़ता है, और प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है।”
प्रशासन की प्रतिक्रिया
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि वे जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए प्रयास कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में नालियों की सफाई शुरू की गई है, और पानी निकालने के लिए पंप भी लगाए गए हैं। हालांकि, भारी बारिश के कारण इन प्रयासों में देरी हो रही है। एक अधिकारी ने बताया, “हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।”
स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाले। उनके सुझावों में नालियों का पुनर्निर्माण, उचित जल निकासी प्रणाली का विकास, और बारिश से पहले नियमित सफाई शामिल है। लोगों का कहना है कि केवल तात्कालिक उपायों से काम नहीं चलेगा; दीर्घकालिक योजना और जवाबदेही तय करना जरूरी है।
कोरबा में बारिश और जलभराव ने एक बार फिर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या हर मानसून में लोगों के लिए मुसीबत बनी रहेगी। अब यह देखना बाकी है कि क्या जिला प्रशासन और नगर निगम इस संकट से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाएंगे, या यह मुद्दा केवल आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा।
Editor – Niraj Jaiswal
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