कोरबा जिले में स्थित बहुउद्देशीय हसदेव बांगो बांध परियोजना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते जल संसाधन विभाग ने स्थिति पर कड़ी नजर रखी है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जलस्तर 358.10 मीटर तक पहुंचने पर बांध के गेट खोलने का निर्णय लिया जा सकता है। इस प्रक्रिया से पहले प्रशासन और संबंधित क्षेत्रों के लोगों को अग्रिम सूचना दी जाएगी ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
पिछले कुछ दिनों से कोरबा और आसपास के क्षेत्रों, विशेष रूप से कोरिया जिले में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण हसदेव नदी में पानी का प्रवाह तेजी से बढ़ा है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता धर्मेंद्र नीखरा ने बताया कि वर्तमान में बांध का जलस्तर 358.08 मीटर तक पहुंच चुका है। बुधवार को प्रति सेकंड एक लाख क्यूसेक पानी बांध में पहुंच रहा था, जो अब घटकर 24,000 क्यूसेक रह गया है। इसके बावजूद, जलस्तर में वृद्धि की संभावना बनी हुई है, जिसके कारण विभाग सतर्क है।
नीखरा ने कहा, “हम स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। यदि जलस्तर 358.10 मीटर तक पहुंचता है, तो बांध के गेट खोलने की स्थिति बन सकती है। हम आज शाम तक स्थिति का आकलन करेंगे और उसके आधार पर निर्णय लेंगे।”
हसदेव बांगो बांध, जो विश्व बैंक और पूर्ववर्ती मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से पौड़ी उपरोड़ा विकासखंड में बनाया गया, छत्तीसगढ़ की पहली बहुउद्देशीय जल परियोजना है। यह बांध न केवल कोरबा जिले की विद्युत परियोजनाओं और औद्योगिक इकाइयों की जल आवश्यकताओं को पूरा करता है, बल्कि कोरबा, जांजगीर-चांपा और सक्ती जिलों की सिंचाई और सामान्य जल आपूर्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कुल जल भंडारण क्षमता 2.89 घन किलोमीटर है और यह 120 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता रखता है।
जल संसाधन विभाग ने पहले ही बरसाती मौसम और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए हसदेव नदी के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है। ग्रामीणों को अपनी संपत्तियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और नदी किनारे अनावश्यक गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया कि उद्योगों और जनता की जल आवश्यकताओं की पूर्ति उनकी प्राथमिकता है, लेकिन संकट की स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
हाल ही में भारी बारिश के कारण बांध के आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसके चलते 40 परिवारों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया था। बांध के गेट खोलने की स्थिति में नदी के किनारे बसे गांवों, जैसे मोतीसागरपाड़ा, सीतामणी और इमलीडुग्गु, में जलभराव का खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन ने इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ा दी है और आपदा प्रबंधन टीमें तैयार रखी गई हैं।
जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बांध की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और गेट खोलने का निर्णय सावधानीपूर्वक लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और क्षेत्र की जल आवश्यकताओं का संतुलन बनाए रखना है। गेट खोलने से पहले सभी संबंधित पक्षों को सूचित किया जाएगा ताकि कोई नुकसान न हो।”
हसदेव बांगो बांध का बढ़ता जलस्तर और बारिश की स्थिति ने कोरबा जिले में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। विभाग की सतर्कता और समय पर लिए गए निर्णय क्षेत्र में बाढ़ जैसी आपदाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। स्थानीय लोग और प्रशासन दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, और उम्मीद की जा रही है कि सावधानीपूर्वक प्रबंधन से किसी भी बड़े संकट से बचा जा सकेगा।


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