कोरबा जिले में बिजली कंपनियों में कार्यरत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के तकनीकी कर्मचारियों में तीन प्रतिशत तकनीकी भत्ता केवल अधिकारियों को दिए जाने के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है। छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी महासंघ ने इस मुद्दे पर कड़ा ऐतराज जताते हुए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के तकनीकी कर्मचारियों के लिए भी तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की मांग की है। कर्मचारी संघ का कहना है कि बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण जैसे तकनीकी कार्यों में इन कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान होता है, फिर भी उन्हें इस भत्ते से वंचित रखा गया है।
तकनीकी भत्ता केवल अधिकारियों तक सीमित
अप्रैल 2024 से बिजली कंपनियों में केवल अभियंता स्तर के अधिकारियों, जैसे सहायक अभियंता से लेकर कार्यपालक निदेशक तक, को ही तीन प्रतिशत तकनीकी भत्ता दिया जा रहा है। कर्मचारी संघ ने इस भेदभावपूर्ण नीति पर आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि बिजली कंपनियों में उपभोक्ताओं तक सतत बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन कर्मचारियों को बिजली दुर्घटनाओं और अन्य जोखिमों का सामना करना पड़ता है, लेकिन तकनीकी भत्ता केवल डिग्रीधारक अभियंताओं तक सीमित कर दिया गया है।
कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान
छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी महासंघ के अनुसार, तकनीकी भत्ता न मिलने से लगभग 8,000 कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी का न्यूनतम बेसिक वेतन 40,000 रुपये है, तो उसे तीन प्रतिशत तकनीकी भत्ते के रूप में 1,200 रुपये अतिरिक्त मिलने चाहिए। अधिक बेसिक वेतन वाले कर्मचारियों को इससे भी अधिक राशि का लाभ मिल सकता है।
तकनीकी योग्यता के आधार पर भर्ती
महासंघ के महामंत्री नवरतन बरेठ ने कहा कि बिजली कंपनियों में मैदानी क्षेत्रों और संयंत्रों में काम करने वाले तकनीकी कर्मचारी ही तकनीकी भत्ते के असली हकदार हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी में भर्ती के समय सभी कर्मचारियों से शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता मांगी जाती है, और उसी आधार पर उनकी नियुक्ति होती है। इसलिए, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सभी तकनीकी कर्मचारियों को भी इस भत्ते का लाभ मिलना चाहिए।
प्रबंधन की अनदेखी से नाराजगी
महासंघ ने प्रबंधन पर लगातार इस मुद्दे की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मेहनत और जोखिम को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है। इस भेदभावपूर्ण नीति के खिलाफ कर्मचारी संघ ने प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आगे और सख्त कदम उठा सकते हैं। इस मुद्दे पर बिजली कंपनी प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच इस विवाद के समाधान पर सभी की नजर बनी हुई है।
Editor – Niraj Jaiswal
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