रायपुर।छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के 16,000 से अधिक कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 15 दिनों से चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को और तेज हो गई। मिशन प्रबंधन द्वारा सोमवार को जारी अंतिम अल्टीमेटम, जिसमें 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने की चेतावनी दी गई थी, के विरोध में कर्मचारियों ने संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ के कार्यालय का घेराव किया। हड़ताली कर्मचारियों ने कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की, आदेश की कॉपी फाड़कर जलाई और मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया।
सेवा समाप्ति की चेतावनी से भड़के कर्मचारी
आयुक्त सह मिशन संचालक, NHM छत्तीसगढ़ ने हड़ताली कर्मचारियों को नोटिस जारी कर कहा कि उनकी अनाधिकृत अनुपस्थिति और हड़ताल लोकहित के विरुद्ध है। सभी जिला चिकित्सा अधिकारियों द्वारा पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं, और कार्यकारिणी समिति की बैठक में सक्षम स्तर पर सेवा समाप्ति का निर्णय लिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया कि यदि कर्मचारी 24 घंटे में कार्यस्थल पर नहीं लौटते, तो उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। इस चेतावनी के जवाब में कर्मचारियों ने मंगलवार को संचालनालय का घेराव कर सरकार और प्रबंधन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया।
10 सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी
NHM कर्मचारी लंबे समय से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल समाप्त नहीं होगी। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
नियमितीकरण: संविदा कर्मचारियों की सेवाओं का स्थायीकरण।
पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना: स्वास्थ्य सेवाओं में विशिष्ट कैडर की मांग।
ग्रेड पे निर्धारण: वेतन संरचना में ग्रेड पे का निर्धारण।
लंबित 27% वेतन वृद्धि: लंबित वेतन वृद्धि का भुगतान।
CR सिस्टम में पारदर्शिता: कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता।
रेगुलर भर्ती में सीटों का आरक्षण: नियमित भर्ती में NHM कर्मचारियों के लिए आरक्षण।
अनुकंपा नियुक्ति: मृत कर्मचारियों के परिवारों के लिए नियुक्ति की सुविधा।
मेडिकल और अन्य अवकाश: चिकित्सा और अन्य अवकाशों की सुविधा।
ट्रांसफर पॉलिसी: स्थानांतरण नीति का निर्धारण।
मिनिमम 10 लाख कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस: सभी कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा बीमा।
प्रदर्शन और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
कर्मचारियों ने संचालनालय के बाहर नारेबाजी करते हुए सरकार से तत्काल मांगें पूरी करने की अपील की। इस हड़ताल के कारण प्रदेश भर में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में टीकाकरण, ओपीडी सेवाएं और अन्य चिकित्सा कार्य ठप हो गए हैं। ग्रामीण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और आपातकालीन सेवाएं सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं।
सरकार का रुख और कर्मचारियों की प्रतिक्रिया
NHM कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं, लेकिन सरकार उनकी मूलभूत मांगों को अनसुना कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन और तेज होगा। दूसरी ओर, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पहले बयान दिया था कि कुछ मांगों पर विचार के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
हड़ताल और सेवा समाप्ति की चेतावनी के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों के लिए अंत तक लड़ेंगे, जबकि सरकार ने सख्ती बरतते हुए हड़ताल को अवैध और लोकहित के खिलाफ करार दिया है। इस गतिरोध का समाधान निकलना अब समय की मांग है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं पुनः सुचारू हो सकें।
Editor – Niraj Jaiswal
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