रेत माफियाओं की मनमानी: कलेक्टर के प्रतिबंध आदेश को ठेंगा, बांकीमोंगरा-कटघोरा में अवैध उत्खनन जोरों पर

कोरबा जिला प्रशासन ने मानसून को ध्यान में रखते हुए जिले की नदियों और नालों से रेत उत्खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अक्टूबर तक वैध और अवैध दोनों तरह के रेत उत्खनन पर रोक रहेगी। इसके लिए खनिज विभाग की टीम को तत्काल कार्रवाई करने और अवैध उत्खनन में शामिल वाहनों को जब्त करने के आदेश दिए गए हैं। हालांकि, बांकीमोंगरा और कटघोरा क्षेत्र में रेत माफिया इन आदेशों की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं, जिससे प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

बांकीमोंगरा और कटघोरा में बेलगाम रेत माफिया

खनिज विभाग की समय-समय पर कार्रवाई के बावजूद बांकीमोंगरा और कटघोरा क्षेत्र में रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। इन क्षेत्रों में दिन-रात डबल इंजन ट्रैक्टरों के जरिए अवैध रेत उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। बांकीमोंगरा के तेलसरा, कुमगरी, सुमेधा, गजरा, छुराकछार, मढ़वाढोडा, पुरेना, कोराई, ढपढ़प और घनाकछार जैसे गांवों के साथ-साथ कटघोरा क्षेत्र की अहिरन नदी, ढेलवाडिह, धवाईपुर और अन्य नदियों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। माफिया नदियों का सीना चीरकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है।

पुलिस और खनिज विभाग की निष्क्रियता

बांकीमोंगरा पुलिस की भूमिका भी इस मामले में संदेह के घेरे में है। हालांकि, कभी-कभी चौराहों पर रेत से भरे ट्रैक्टर दिखने पर पुलिस उन्हें थाने ले जाती है, लेकिन नियमित और सख्त कार्रवाई का अभाव साफ दिखाई देता है। खनिज विभाग की टीमें भी इन क्षेत्रों में प्रभावी दबिश देने में नाकाम रही हैं, जिसके चलते रेत माफिया कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं।

पर्यावरण और राजस्व को नुकसान

अवैध रेत उत्खनन से न केवल नदियों का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत माफियाओं की बेखौफ गतिविधियों के कारण नदियों का जलस्तर प्रभावित हो रहा है, जिससे आसपास के गांवों में सिंचाई और पेयजल की समस्या गहरा सकती है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

जिला प्रशासन और खनिज विभाग से स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि बांकीमोंगरा और कटघोरा क्षेत्र में नियमित छापेमारी और सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, पुलिस को भी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तत्परता दिखानी होगी। इस मामले में कलेक्टर के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि रेत माफियाओं पर लगाम लग सके और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके।