नक्सल मुक्ति का दावा, लेकिन स्कूलों की बदहाली बरकरार, टीन शेड में पढ़ने को मजबूर बच्चे

कोण्डागांव।जिला प्रशासन भले ही कोण्डागांव को नक्सल मुक्त घोषित करने की बात कहे, लेकिन जमीनी हकीकत शिक्षा के क्षेत्र में बदहाली की तस्वीर पेश करती है।

नक्सलियों का खौफ भले ही कम हुआ हो, लेकिन मांझानार, उहुपाल और तुमड़ीबाल जैसे दूरस्थ गांवों में बच्चे आज भी जर्जर टीन शेड और अधूरी दीवारों वाले स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं।

इन गांवों में स्कूलों की इमारतें जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं, जहां न तो पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं हैं और न ही सुरक्षित पढ़ाई का माहौल। टीन शेड के नीचे चल रही कक्षाएं बारिश और गर्मी में बच्चों के लिए मुश्किलें पैदा करती हैं। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है, जिससे बच्चों का भविष्य अधर में है।

जिला प्रशासन के नक्सल मुक्ति के दावों के बीच शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत की अनदेखी सवाल खड़े कर रही है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार इन स्कूलों के लिए पक्की इमारतें, शिक्षक और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराए ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। इस मामले में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।