चंद्रशेखर आजाद चौक की मूर्ति उपेक्षा और अतिक्रमण की चपेट में, नामकरण भी प्रचलन से बाहर

कोरबा-बालकोनगर।स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी चंद्रशेखर आजाद की स्मृति को जीवित रखने के लिए कोरबा के बालकोनगर में परसा भाठा चौक पर उनकी आदमकद मूर्ति स्थापित की गई और इसका नामकरण चंद्रशेखर आजाद चौक किया गया। हालांकि, यह चौक आज भी सामान्य बोलचाल और प्रचलन में परसा भाठा चौक के नाम से ही जाना जाता है, जिससे महापुरुष के सम्मान में किया गया नामकरण प्रभावहीन हो रहा है।

मूर्ति और चौक की दयनीय स्थिति

चंद्रशेखर आजाद की मूर्ति न केवल उपेक्षा का शिकार है, बल्कि अतिक्रमण की कैद में भी है। चौक के चारों ओर ठेले और गुमटियों ने कब्जा जमा लिया है, जबकि मूर्ति की ओर जाने वाले मुख्य द्वार के सामने जलजमाव और गंदगी का आलम रहता है। चौक के अंदर टूट-फूट की स्थिति है और साफ-सफाई का पूर्ण अभाव है। साल में केवल आजाद की जयंती और पुण्यतिथि पर ही जनप्रतिनिधि यहां पहुंचते हैं, जबकि राष्ट्रीय त्योहारों पर भी इस स्थान की अनदेखी होती है।

स्थानीय लोगों की नाराजगी

स्थानीय निवासियों का कहना है कि चंद्रशेखर आजाद जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी की मूर्ति की ऐसी स्थिति उनके सम्मान को ठेस पहुंचाती है। यदि रोजी-रोटी के लिए दुकानों की व्यवस्था आवश्यक है, तो व्यवस्थित दुकानें बनाकर अतिक्रमण मुक्त और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वर्तमान में चौक की स्थिति सम्मान से अधिक अपमान का अनुभव कराती है।

जनप्रतिनिधियों पर उठ रहे सवाल

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी को इस बदहाली का प्रमुख कारण माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि महापुरुषों की स्मृति को जीवित रखने के लिए स्थापित मूर्तियों और चौकों का रखरखाव और सौंदर्यीकरण सुनिश्चित करना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।

सुधार की मांग

स्थानीय समुदाय ने मांग की है कि चंद्रशेखर आजाद चौक को अतिक्रमण मुक्त किया जाए, नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित हो और इसका नाम प्रचलन में लाया जाए। इससे न केवल महापुरुष के सम्मान की रक्षा होगी, बल्कि नई पीढ़ी को उनके योगदान से प्रेरणा भी मिलेगी।