रायपुर।छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन (सीजीएमएससी) की लापरवाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में पैरासिटामोल की गुणवत्ताहीन गोलियों का मामला सामने आने के बाद सीजीएमएससी ने तीन दवाओं के उपयोग और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी है। इन दवाओं की आपूर्ति प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पहले ही हो चुकी थी, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई है।
सीजीएमएससी ने जिन दवाओं पर रोक लगाई है, उनमें पैरासिटामोल 650 एमजी (बैच नंबर आरटी 24045, 9 एम इंडिया लिमिटेड), पैरासिटामोल 500 एमजी (बैच नंबर आरटी 23547 और आटी 240320, 9 एम इंडिया लिमिटेड) तथा एसिक्लोफिनेक 100 एमजी और पैरासिटामोल 325 एमजी (बैच नंबर एपीसी 508, हीलर्स लेब) शामिल हैं। जांच में पैरासिटामोल 500 एमजी की 48 हजार गोलियों पर स्पष्ट धब्बे और फंगस पाए गए, जिसके बाद इन्हें अस्पतालों से वापस मंगाया गया।
इन दवाओं की आपूर्ति पहले ही सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में हो चुकी थी, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। गुणवत्ताहीन दवाओं का उपयोग मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है। सीजीएमएससी की इस लापरवाही ने स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पैरासिटामोल की गुणवत्ता को लेकर अगस्त में खबरों के बाद सीजीएमएससी ने तुरंत कदम उठाते हुए इन तीन दवाओं के बैच पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। हालांकि, यह कार्रवाई तब हुई, जब दवाएं पहले ही स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच चुकी थीं। इस घटना ने सीजीएमएससी की दवा आपूर्ति और गुणवत्ता जांच प्रक्रिया में खामियों को उजागर किया है।
यह पहली बार नहीं है जब सीजीएमएससी की दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दवा आपूर्ति से पहले कठोर गुणवत्ता जांच और निगरानी की आवश्यकता है ताकि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो। प्रशासन से मांग की जा रही है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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