भूविस्थापितों का एसईसीएल कुसमुंडा कार्यालय पर प्रदर्शन, खदान बंद करने की चेतावनी

कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा और भूविस्थापित रोजगार एकता संघ के बैनर तले भूविस्थापितों ने रोजगार और पुनर्वास संबंधी लंबित मांगों को लेकर आज एसईसीएल कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के मुख्य द्वार को बंद कर नारेबाजी की और धरने पर बैठ गए। साथ ही कार्यालय का घेराव भी किया गया।

प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप

भूविस्थापितों का आरोप है कि एसईसीएल प्रबंधन ने कोयला उत्खनन के लिए उनकी जमीन तो अधिग्रहित कर ली, लेकिन रोजगार और पुनर्वास के मामले में लगातार टालमटोल कर रहा है। उनकी बार-बार की मांगों के बावजूद प्रबंधन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन के बाद वे कुसमुंडा खदान में जाएंगे और वहां कोयला खनन, परिवहन और उत्पादन संबंधी गतिविधियों को रोककर खदान बंद कराएंगे।

भूविस्थापितों की 9 सूत्रीय मांगें

प्रदर्शनकारियों ने अपनी 9 सूत्रीय मांगों को दोहराया, जिसमें शामिल हैं:

भूमि अधिग्रहण के बदले प्रभावितों को रोजगार प्रदान करना।

उचित मुआवजा देना।

पूर्व में अधिग्रहित खमहरिया की जमीन को मूल किसानों को वापस करना।

प्रभावित गांवों के बेरोजगारों को खदान में काम देने की व्यवस्था।

पुनर्वास गांव में बसे भूविस्थापितों को कब्जे वाली भूमि का पट्टा देना।

आउटसोर्सिंग कार्यों में भूविस्थापितों को प्राथमिकता देना।

मुआवजे में नए-पुराने के नाम पर कटौती बंद करना।

भैसमाखार के विस्थापितों को बसावट और मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दी गई नौकरियों की जांच और अपात्र लोगों को हटाना।

आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी

छत्तीसगढ़ किसान सभा और भूविस्थापित रोजगार एकता संघ ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे और जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन खदान बंद आंदोलन शुरू करेंगे।