जिला जेल में हाईटेक न्याय प्रणाली: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ट्रायल्स में तेजी, बंदियों की संख्या घटी

कोरबा जिला जेल में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के लागू होने के बाद हाईटेक प्रैक्टिस की शुरुआत ने न्याय प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। 1 जुलाई 2024 से लागू बीएनएस ने 1860 की भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) का स्थान ले लिया है, और इसके साथ ही जिला जेल और न्यायालय के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ट्रायल्स की व्यवस्था शुरू हो चुकी है। इस नई प्रणाली के चलते जिला जेल में बंदियों की संख्या 300 से घटकर 195 रह गई है, जो कि जेल की 230 की क्षमता से भी कम है।

जेलर के अनुसार, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ट्रायल्स में तेजी आई है, जिसके परिणामस्वरूप बंदियों की संख्या में कमी आई है। हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला जेल और कोर्ट रूम में हाईटेक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम स्थापित किए गए हैं, जिनमें उच्च स्तरीय उपकरण और मजबूत नेटवर्क की व्यवस्था है। इस प्रणाली के तहत बंदी जेल के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम से गवाहों के बयान तक पढ़ सकते हैं। इससे न केवल ट्रायल्स में तेजी आई है, बल्कि बंदियों को कोर्ट लाने-ले जाने का खर्च, फरार होने की घटनाएं और कोविड जैसी परिस्थितियों में संक्रमण का खतरा भी कम हुआ है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के फायदे

खर्च में कमी: बंदियों को कोर्ट लाने-ले जाने का व्यय कम हुआ।

सुरक्षा: फरार होने की घटनाएं लगभग खत्म।

स्वास्थ्य सुरक्षा: कोविड जैसी परिस्थितियों में संक्रमण का जोखिम कम।

तेजी से ट्रायल्स: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई में तेजी।

सुधार की आवश्यकता

हालांकि, इस व्यवस्था में कुछ कमियां भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर नेटवर्क कनेक्शन के कारण कई बार ट्रायल्स में बाधा उत्पन्न होती है। पहले बंदियों को कोर्ट लाने पर वकील और पक्षकार के बीच रणनीति बनाने के लिए संवाद का अवसर मिलता था, लेकिन अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के कारण यह संवाद सीमित हो गया है। इससे कई बार जमानत न मिलने की समस्या उत्पन्न होती है। जानकारों ने सुझाव दिया है कि कोर्ट में एक विशेष रूम बनाया जाए, जहां वकील और पक्षकार के बीच संवाद संभव हो सके, ताकि पक्षकार का पक्ष मजबूती से रखा जा सके।