साढ़े चार घंटे थमा रहा पसान मार्ग, 5 मांगों को लेकर ग्रामीणों का चक्का जाम

स्थायी डॉक्टर, निर्बाध बिजली, रेलवे स्टेशन, कॉलेज और उदेरदा पिकनिक स्पॉट के विकास की मांग

कोरबा। पसान क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों, स्थानीय व्यापारियों और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। पसान बस स्टैंड के पास सुबह 7 बजे शुरू हुआ आंदोलन करीब साढ़े चार घंटे तक चला। इस दौरान मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद करीब 11.30 बजे आंदोलन समाप्त किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि पसान क्षेत्र लंबे समय से स्वास्थ्य और बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। करीब एक सप्ताह पहले तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के निराकरण की मांग की गई थी। निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया।

स्थायी एमबीबीएस डॉक्टर की मांग: प्रदर्शनकारियों ने पसान स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी एमबीबीएस डॉक्टर की पदस्थापना की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार डॉक्टर की नियमित उपलब्धता नहीं होने से गंभीर मरीजों को दूसरे शहरों में ले जाना पड़ता है।

बिजली व्यवस्था सुधारने की मांग: पसान फीडर को अलग करने, खराब ट्रांसफॉर्मर बदलने, जर्जर तारों की मरम्मत तथा कमजोर व ढीले बिजली खंभों को बदलने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों ने बार-बार ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या दूर करने की मांग की।

रेलवे स्टेशन और कॉलेज का मुद्दा: ग्रामीणों ने पसान में प्रस्तावित रेलवे स्टेशन का निर्माण शुरू कराने, करीब पांच वर्षों से बंद कॉलेज निर्माण कार्य को दोबारा प्रारंभ करने और उदेरदा पिकनिक स्पॉट के विकास की मांग रखी। रेलवे लाइन से बंद रास्ते को पुन: खोलने की मांग भी की गई।

लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त: सूचना मिलने पर तहसीलदार वीरेंद्र सिंह श्याम पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। चर्चा के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य और बिजली संबंधी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। पसान फीडर अलग करने का प्रस्ताव शासन को भेजने तथा एमबीबीएस डॉक्टर की पदस्थापना प्रक्रिया शुरू कराने की बात कही गई।

ग्रामीण युसूफ खान के अनुसार विद्युत विभाग ने बिजली संबंधी मांगों को छह माह के भीतर पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया है। वहीं रेलवे स्टेशन, कॉलेज और उदेरदा पिकनिक स्पॉट से संबंधित मांगों पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को 15 दिन का समय दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि समय-सीमा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा व्यापक आंदोलन किया जाएगा।